गंडमूल दोष -:
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में गंडमूल नक्षत्रों को अच्छा नहीं माना गया है। गंड मूल नक्षत्रों में उत्पन्न जातक को गंड मूल दोष लगता है। गंड मूल नक्षत्र स्वयं जातक, जातक के माता-पिता, भाई-बहन, नाना नानी आदि के लिए अशुभ हो सकते हैं। इसलिए गंड मूल दोष में उत्पन्न जातक की शांति कराई जाती है। ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र होते हैं। जिनमें से 6 नक्षत्रों को गंडमूल कहा गया है। वे नक्षत्र जिनका स्वामी केतु व बुध देव होते हैं। वे नक्षत्र गंडमूल होते हैं। जो इस प्रकार हैं।
१, अश्विनी २, अश्लेषा,३,मघा ४, ज्येष्ठा ५,मूल ६, रेवती
इनमें से अश्वनी, मघा व मूल नक्षत्र के स्वामी केतु देव होते हैं और अश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती नक्षत्र के स्वामी बुध देव होते हैं।
गंड मूल दोष का निर्माण कैसे होता है ?
जब राशि और नक्षत्र एक ही स्थान पर मिलते हैं या उदय होते है तो वहां गंड मूल नक्षत्र का निर्माण होता है।
जैसे -:
१, कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र का समापन और सिंह राशि व मघा नक्षत्र का उदय एक साथ हो रहा हो तो वहां अश्लेषा व मघा नाम के गंडमूल दोष बनते है।
२, इसी प्रकार यदि वृश्चिक राशि और जेष्ठा नक्षत्र का समापन एक साथ हो और धनु और मूल नक्षत्र का उदय हो तो वहां ज्येष्ठा व मूल नाम के गंड मूल दोष बनते हैं।
३, इसी तरह यदि मीन राशि व रेवती नक्षत्र का समापन एक साथ हो और अश्वनी और मेष राशि का उदय एक साथ हो रहा हो तो वहां रेवती व अश्विनी नामक गंड मूल दोष का निर्माण होता है।
गंडमूल नक्षत्रों को अशुभ क्यों माना गया है?
सनातन ज्योतिष शास्त्र में लग्न नक्षत्र राशि के संधि काल को अशुभ माना जाता है और गंड मूल नक्षत्र संधि काल के होते हैं इसलिए इनका बुरा प्रभाव जातक पर पड़ता है। इसलिए गंड मूल नक्षत्र में उत्पन्न जातक व जातक के परिजनों को निम्न प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ता है।
१, स्वयं जातक को स्वास्थ्य संबंधी कष्ट का सामना करना पड़ता है।
२, जातक के माता-पिता को भी स्वास्थ्य संबंधी कष्टों का सामना करना पड़ता है।
३, जातक के जीवन में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव अधिक रहता है व जातक का जीवन संघर्षमय रहता है।
४, जातक के परिवार में दरिद्रता आती है व
जातक के जीवन में दुर्घटना की अधिक संभावना रहती है।
५, जातक का भाग्य जातक का साथ बहुत कम देता है।
गंड मूल दोष शांति के उपाय -'
यदि किसी जातक का जन्म गंडमूल नक्षत्रों में होता है तो जातक के जन्म के 27 दिन बाद जब वह नक्षत्र पुनः आता है। उस दिन गंड मूल नक्षत्र की विद्वान आचार्य के द्वारा गंडमूल दोष शांति करनी चाहिए।
विशेष -:
यदि किसी कारणवश या भूल बस हम 27 दिन के बाद गंड मूल दोष शांति नहीं करा पाते हैं तो निम्न उपाय करके गंड मूल दोष के दोष को दूर किया जा सकता है।
१, प्रत्येक अमावस्या को ब्राह्मण को भोजन कराएं
२, जातक के माता-पिता को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए
३, किसी देवालय में शिवलिंग की स्थापना करवाएं
४, जरूरतमंद लोगों को दान देवें
५, नागदेव को दूध पिलाऐ और पूजन करें
आचार्य श्री कौशल कुमार शास्त्री
9414657245

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