कुंडली मिलान करने की संपूर्ण विधि — वैदिक ज्योतिष के अनुसार -: ,नमस्ते मित्रों आज हम वर कन्याकी कुंडली मिलान के बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं आईए जानते हैं कुंडली मिलान में मुख्य रूप से क्या-क्या देखा जाता है विवाह के लिए कुंडली मिलान करते समय केवल 36 …
Read moreज्योतिष शास्त्र के अनुसार चोरी हुई वस्तु या गुम हुए व्यक्ति का पता लगाने का संपूर्ण विश्लेषण -: वैदिक ज्योतिष में खोई हुई वस्तु, चोरी हुई संपत्ति और लापता व्यक्ति के बारे में विचार करने के लिए मुख्य रूप से प्रश्न ज्योतिष, प्रश्न कुंडली, लग्न, चंद्रमा, द्विती…
Read moreसूर्य का तुला राशि में गोचर 2026: सभी 12 राशियों पर प्रभाव -: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सूर्य का तुला राशि में गोचर एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना है। सूर्य को आत्मविश्वास, आत्मबल, पिता, सरकार, प्रशासन, प्रतिष्ठा और नेतृत्व का कारक माना जाता है। तुला राशि में …
Read moreशादी की उम्रका विश्लेषण -: नमस्कार मित्रों! आज हम एक महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने जा रहे हैंआज की हमारी चर्चा का विषय है वैदिक ज्योतिष से हम मैरिज का उम्र कैसे निकालते हैं तो आज हम इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हैंl वैदिक ज्योतिष में विवाह की उम्र निकाल…
Read moreNavgrahon ke Ratan -: वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रहों (नवग्रह) है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार प्रत्येक रत्न संबंधित ग्रह की शुभ शक्ति को बढ़ाने के लिए धारण किया जाता ह माणिक्य सूर्य आत्मविश्वास, नेतृत्व, प्रतिष्ठा, साहस और पिता/अधिकारी पक्ष से संबंधित शुभता मो…
Read moreरुचक नामक पंच महापुरुष योग -: ज्योतिष शास्त्र में पंच महापुरुष योगों में रुचक योग एक प्रमुख योग है। इसका निर्माण मंगल ग्रह से होता है। 1. रुचक योग का निर्माण जब मंगल ग्रह— अपनी स्वराशि मेष या वृश्चिक में हो, अथवा अपनी उच्च राशि मकर में हो, और इनमें से किसी रा…
Read moreभकूट दोष को विवाह कुंडली मिलान में इस प्रकार समझें -:: 1. भकूट दोष कैसे बनता है? वर और वधू की चंद्र राशियों के बीच संबंध देखा जाता है। यदि चंद्र राशियों की स्थिति निम्न प्रकार हो तो सामान्यतः भकूट दोष माना जाता है: राशि संबंध नाम सामान्य मान्यता 2–12 द्विद…
Read moreदशमांश कुंडली (D-10) से करियर का निर्धारण कैसे करें – दशमांश कुंडली (D-10 Chart) वैदिक ज्योतिष में व्यवसाय, नौकरी, पद-प्रतिष्ठा, करियर की दिशा, सफलता, पदोन्नति और कार्यक्षेत्र को समझने की अत्यंत महत्वपूर्ण कुंडली मानी जाती है। जिस प्रकार जन्म कुंडली (D-1) जी…
Read moreशुक्र देव का अपनी नीच कन्या राशि में गोचर का परिणाम -: शुक्र देव का नीच राशि कन्या में गोचर ज्योतिष में महत्वपूर्ण माना जाता है। शुक्र भोग-विलास, प्रेम, विवाह, दांपत्य, सौंदर्य, कला, वाहन, वस्त्र, आभूषण और भौतिक सुखों का कारक है। जब शुक्र कन्या राशि में गोचर…
Read moreदक्षिण दिशाका वास्तु टिप्स -: दक्षिण दिशा वास्तुशास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। इसका स्वामी यम देव तथा ग्रह मंगल ग्रह माने जाते हैं। यह दिशा स्थिरता, आत्मबल, अनुशासन, भूमि, सुरक्षा, प्रतिष्ठा और जीवन में नियंत्रण का प्रतीक है। यदि दक्षिण दिशा संतु…
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