दशमांश कुंडली (D-10) से करियर का निर्धारण कैसे करें – दशमांश कुंडली (D-10 Chart) वैदिक ज्योतिष में व्यवसाय, नौकरी, पद-प्रतिष्ठा, करियर की दिशा, सफलता, पदोन्नति और कार्यक्षेत्र को समझने की अत्यंत महत्वपूर्ण कुंडली मानी जाती है। जिस प्रकार जन्म कुंडली (D-1) जी…
Read moreशुक्र देव का अपनी नीच कन्या राशि में गोचर का परिणाम -: शुक्र देव का नीच राशि कन्या में गोचर ज्योतिष में महत्वपूर्ण माना जाता है। शुक्र भोग-विलास, प्रेम, विवाह, दांपत्य, सौंदर्य, कला, वाहन, वस्त्र, आभूषण और भौतिक सुखों का कारक है। जब शुक्र कन्या राशि में गोचर…
Read moreदक्षिण दिशाका वास्तु टिप्स -: दक्षिण दिशा वास्तुशास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। इसका स्वामी यम देव तथा ग्रह मंगल ग्रह माने जाते हैं। यह दिशा स्थिरता, आत्मबल, अनुशासन, भूमि, सुरक्षा, प्रतिष्ठा और जीवन में नियंत्रण का प्रतीक है। यदि दक्षिण दिशा संतु…
Read moreलॉटरी योग-: वैदिक ज्योतिष में लॉटरी, देखने के लिए मुख्य रूप से 5वें, 8वें, 9वें और 11वें भाव तथा उनके स्वामियों का विश्लेषण किया जाता है। केवल एक योग के आधार पर लॉटरी मिलने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता; कई योगों का एक साथ होना और अनुकूल दशा-गोचर आवश्यक…
Read moreनिर्जला एकादशी 2026 (भीमसेनी एकादशी) -: निर्जला एकादशी ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है। वर्ष 2026 में यह 25 जून, गुरुवार को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 24 जून सायं 6:12 बजे से प्रारम्भ होकर 25 जून रात्रि 8:09 बजे तक रहेगी। व्रत का पारण 26 जून प्रातः 5:25 …
Read moreप्रदोष व्रत का महत्व -: प्रदोष व्रत भगवान और माता Parvati की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की संध्या (प्रदोष काल) में किया जाता है। प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व भगवान शिव की विशेष क…
Read moreनिर्जला एकादशी का महत्व -: निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इसका वर्णन महाभारत तथा पद्म पुराण में मिलता है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। मान्यता है कि जो व्यक्ति व…
Read moreअधिक मास की सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व -: जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यदि यह अमावस्या अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में आए, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। वैदिक और पुराणिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन पितृ तर्पण, भ…
Read moreअधिक मास स्नान के नियम -: अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में स्नान के कुछ पारंपरिक नियम और विधियाँ मानी जाती हैं। इस महीने में स्नान, जप, दान और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। अधिक मास स्नान के मुख्य नियम ब्रह्ममुहूर्त में स्नान सूर्योदय से पह…
Read moreगंगा दशमी कब मनाई जाएगी ? वर्ष 2026 में गंगा दशमी (गंगा दशहरा) 25 मई 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। गंगा दशमी क्यों मनाई जाती है? …
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