रुचक नामक पंच महापुरुष योग -: ज्योतिष शास्त्र में पंच महापुरुष योगों में रुचक योग एक प्रमुख योग है। इसका निर्माण मंगल ग्रह से होता है। 1. रुचक योग का निर्माण जब मंगल ग्रह— अपनी स्वराशि मेष या वृश्चिक में हो, अथवा अपनी उच्च राशि मकर में हो, और इनमें से किसी रा…
Read moreशुक्र देव का अपनी नीच कन्या राशि में गोचर का परिणाम -: शुक्र देव का नीच राशि कन्या में गोचर ज्योतिष में महत्वपूर्ण माना जाता है। शुक्र भोग-विलास, प्रेम, विवाह, दांपत्य, सौंदर्य, कला, वाहन, वस्त्र, आभूषण और भौतिक सुखों का कारक है। जब शुक्र कन्या राशि में गोचर…
Read moreलॉटरी योग-: वैदिक ज्योतिष में लॉटरी, देखने के लिए मुख्य रूप से 5वें, 8वें, 9वें और 11वें भाव तथा उनके स्वामियों का विश्लेषण किया जाता है। केवल एक योग के आधार पर लॉटरी मिलने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता; कई योगों का एक साथ होना और अनुकूल दशा-गोचर आवश्यक…
Read moreप्रदोष व्रत का महत्व -: प्रदोष व्रत भगवान और माता Parvati की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की संध्या (प्रदोष काल) में किया जाता है। प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व भगवान शिव की विशेष क…
Read moreआठवां घर का स्वामी बुध जब फिफ्थ हाउस में नीचे का होता है तो उसका रिजल्ट इस प्रकार का सामान्य रूप से देखा जाता है जब आठवें भाव का स्वामी बुध (मिथुन राशि का स्वामी) पंचम भाव में नीच का होकर बैठता है और गोचर में भी बुध पंचम भाव में आकर नीच का हो जाए, तो यह स्…
Read moreवास्तुशास्त्र -: नमस्कार मित्रों । आज हम वास्तु शास्त्र के बारे में सामान्य जानकारी को लेकर के चर्चा करने जा रहे हैं। आज हम जानेंगे किसी भी भवनप्लॉटका निर्माण करने से पहले वास्तु शास्त्र के अनुसार सामान्य रूप से पहले किन-किन चीजों को देखा जाता है क्या उसमें …
Read moreकेमद्रुम दोष का संपूर्ण विवरण -: नमस्कार साथियों आज हम ज्योतिष शास्त्र के ऐसे महत्वपूर्णदोष की बात करने जा रहे हैं जो कि चंद्रमा के द्वारा निर्मित होता है। जिसे केमद्रुम योग के नाम से जाना जाता है।आईए जानते हैं केंमदु दोष के क्या परिणाम होते हैं। किस प्रका…
Read moreकेतु का द्वादश भाव में शुभ अशुभ फल -: नमस्कार साथियों! आज की चर्चा में हम जानेंगे केतु देव का पत्रिका के द्वादश भाव में शुभ अशुभ परिणाम के विषय में तो आईए जानते हैं केतु देव पत्रिका के सभी भाव में किस प्रकार का सामान्य परिणाम प्रदान करते हैं! जैसा कि हम जान…
Read moreराहु का पत्रिका के 12 भाव में सामान्य फल -: प्रथम भाव व्यक्तित्व में रहस्यमयता, महत्वाकांक्षा, असामान्य सोच स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव, मानसिक बेचैनी विदेश/अलग संस्कृति से जुड़ाव प्रसिद्धि अचानक मिलती है द्वितीय भाव धन अर्जन के अनोखे स्रोत वाणी में कटुता/चा…
Read moreशुक्र का द्वादश भावों में फल -: नीचे शुक्र ग्रह के कुंडली के 1 से 12 भावों में स्थित होने पर मिलने वाले शुभ एवं अशुभ फलों का क्रमबद्ध वर्णन दिया जा रहा है। (यह फल शुक्र की राशि, युति, दृष्टि, बल–निर्बलता के अनुसार घट–बढ़ सकते हैं) प्रथम भाव (लग्न भाव) में शुक…
Read more5 दिसंबर से बृहस्पति के वक्री होकर मिथुन राशि में गोचर का सभी 12 राशियों पर प्रभाव -: गुरु अपनी उच्च कर्क राशि से वक्री होकर 5 दिसंबर से मिथुन राशि में गोचर करने जा रहे हैं। इससे पहले 18 अक्टूबर 2025 को बृहस्पति अतिचार होकर मिथुन राशि से अपनी उच्च कर्क …
Read more28 अक्टूबर से मंगल का वृश्चिकरशि में गोचर -: 28 अक्टूबर 2025 को मंगल अपनी वृश्चिक राशि में गोचर करने जा रहे हैं। जिससे सभी राशियों पर अलग-अलग प्रभाव देखने को मिलेगा तो आईए जानते हैं। मेष से मीन राशि के जातकों पर मंगल के इस गोचर का कैसा रहने वाला है प्रभावन …
Read more11वें भाव में सिंह राशि मे केतु का फलादेश-: 11वाँ भाव (Labha Bhava) जन्मकुंडली में लाभ, आय, मित्र, बड़े भाई-बहन, इच्छाओं की पूर्ति और उपलब्धियों से संबंधित होता है। सिंह राशि (Leo) सूर्य की राशि है — यहाँ अहं, नेतृत्व, आत्माभिमान, रचनात्मकता, और प्रसिद्ध…
Read moreबृहस्पति देव 48 दिन के लिए करेंगे अपनी उच्च राशि में गोचर -: 18 अक्टूबर 2025 को बृहस्पति (गुरु) कर्क राशि में उच्च के होकर प्रवेश करेंगे । उनका यह गोचर 5 दिसंबर तक कंप्लीट 48 दिन के लिए रहेगा। बृहस्पति का exalted होना बहुत ही शुभ माना जाता है क्योंकि कर्क उ…
Read moreनवमांश कुंडली का महत्व -: नवमांश कुंडली (D-9 chart) को समझना और देखना वैदिक ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह विवाह, भाग्य, धर्म, और ग्रहों की वास्तविक शक्ति को दर्शाती है। इसे फलित ज्योतिष में सबसे प्रमुख वर्गोत्तरी कुंडली माना गया है। नवमां…
Read moreवृषभ लग्न पत्रिका में सूर्य देव का फल -: भृगु संहिता एवं शास्त्रीय ज्योतिष सिद्धांतों के अनुसार वृषभ लग्न की जन्मकुण्डली में सूर्यदेव के 12 भावों में स्थान अनुसार फल इस प्रकार माने जाते हैं— प्रथम भाव (लग्न) वृषभ लग्न में सूर्य लग्नेश शुक्र का शत्रु ग्र…
Read moreभृगु संहिता के अनुसार, मेष लग्न में विभिन्न ग्रहों का बारहों भावों में स्थित होने पर जो फल प्राप्त होते हैं,। उनका सामान्य फलादेश इस प्रकार बताया गया है। सूर्य - मेष लग्न में 12 भावों में फल भाव सूर्य का फल 1 तेजस्वी, अहंकारी, नेत्र रोग संभव, आत्…
Read moreएकादशी व्रत का संपूर्ण विस्तृत विधान शास्त्र निर्णय अनुसार -: अग्नि पुराण एक महत्त्वपूर्ण पुराण है जिसमें अनेक विषयों पर विस्तृत विवरण मिलता है, जिसमें व्रत, तीर्थ, पूजा विधि, आयुर्वेद, युद्धनीति आदि शामिल हैं। एकादशी व्रत के विषय में भी अग्नि पुराण में …
Read more29 मार्च को शनि करेंगे राशि परिवर्तन -: 29 मार्च 2025 को शनि का कुंभ से मीन राशि में गोचर – सभी राशियों पर प्रभाव शनि 29 मार्च 2025 को कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। यह परिवर्तन सभी 12 राशियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा। शनि न्याय के देवता …
Read moreवृषभ राशि के जातकों का व्यक्तित्व एवं कार्यशाली -; वृषभ राशि के जातकों का व्यक्तित्व और कार्यशैली व्यक्तित्व: धैर्यशील और स्थिर: वृषभ राशि के जातक स्वभाव से धैर्यवान और स्थिर माने जाते हैं। वे किसी भी परिस्थिति में घबराते नहीं हैं और शांत चित्त से निर्णय…
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