मंगल ग्रह रत्न मूंगा की संपूर्ण विस्तृत जानकारी -:
| मूंगा रत्न के फायदे |
नमस्कार मित्रों!
आज हम नौ ग्रहों के रत्न प्रसंग में मंगल देव का प्रतिनिधित्व करने वाले रत्न मूंगा के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने जा रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में मूंगा मंगल देव का प्रतिनिधित्व करता है। जिन जातकों की जन्म कुंडली में मंगल देव योगकारक होकर का कम अंशो के होते हैं। या सूर्य देव से अस्त होते हैं। उसी स्थिति में मंगल देव के इस रत्न को धारण कर हम मंगल देव को बल प्रदान करके उनसे समुचित अभीष्ट फल प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार मूंगा रत्न का प्राचीन इतिहास रहा है। जिसकी विस्तृत चर्चा आज कि इस पोस्ट कर रहे हैं तो आइए जानते हैं मूंगा रत्न का संपूर्ण इतिहास वृत।
मूंगा रत्न क्या है?
मूंगा को संस्कृत में प्रवाल . लता मणि,अंगारक मणि, अंग्रेजी में coral कहा जाता है। मूंगा रतन भी मोती की तरह खनिज पदार्थ नहीं होता है।यह भी मोती की तरह समुद्र से ही निकाला जाता है। मूंगा का घटक पदार्थ भी मोती की समान ही कैल्शियम कार्बोनेट ही होता है। इस प्रकार मूंगा रत्न भी मोती के समान अपनी सुंदर आभा के कारण ही रत्नों की श्रेणी में माना जाता है। इसका रंग मुख्य रूप से सिंदुरिया व लाल होता है।
मूंगा का प्राप्ति स्थान -:
वैसे तो मूंगा समुद्र में पाया जाता है फिर भी सबसे उत्तम कोटि का मूंगा भूमध्यमहासागर के तटवर्ती अल्जीरिया ईरान की खाड़ी,हिन्दमहासागर आदि से निकाला जाता है।स्पेन तट के मूंगे गहरे लाल रंग के होते हैं। फ्रांसीयो ने सन 1470 में मूंगा निकालने का धंधा बहुत अधिक प्रचलन में लिया गया था। इसके बाद बीच में अंग्रेजों ने इस धंधे को बहुत अधिक जोर से अपनाया। धीरे धीरे 1930 से इटालियन के लोगों ने इस धंधे को अपना प्रमुख व्यवसाय बनाया है। आज भी इटालियन मूंगा मार्केट में पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है। समुद्र से मूंगा निकालने का समय प्रति वर्ष मार्च से अक्टूबर के मध्य होता है। इस अवधि में ही मूंगा निकाला जाता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि मूंगा बनाने वाला समुद्री जीव एक लचीला चिपचिपा पदार्थ छोड़ता है। जो उचित वातावरण में मिलकर समुद्र के जल में व्याप्त कैल्शियम कार्बोनेट से अभिक्रिया करके कठोर हो जाता है। इस प्रकार मूंगा एक निश्चित अवधि में परिपक्व हो जाता है। इसलिए मूंगा निकालने वाले लोग एक निश्चित समय पर एक निश्चित तट से मंगा निकालते हैं। मूंगा जितनी अधिक समुद्र की गहराई से निकाला जाता है उसका रंग उतना ही कम गहरा होता है इस प्रकार समुद्र से मूंगे को निकाल कर काट कर एक अभीष आकार प्रदान किया जाता है। इटली में आज मूंगे को सजाने संवारने के बहुत अधिक कारखाने लगे हुए हैं। आज यहां सैकड़ों की तादाद में कंपनियां इनको आकृति रूप प्रदान करने के कार्य में लगी हुई है। मूंगी से कहीं प्रकार के आभूषण मालाएं व नक्काशी का कार्य किया जाता है। यूरोप की अपेक्षा पूर्वी देशों में मूंगे का प्रचलन अधिक होता है। भारत में भी मूंगे का बहुत अधिक प्रचलन है। हमारे देश में नक्काशी किया हुआ मूंगा अधिक प्रचलन में रहता है।
मूंगा के भौतिक गुण -:
मूंगा मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट का बना हुआ होता है। मूंगी की एक और यह विशेषता होती है कि यह समुद्र में जिस चट्टान से लगा हुआ होता है। उसकी सतह पर लम्बवत खड़ा हुआ होता है। इसकी शाखा के प्रत्येक तंतु केंद्र से लम्बवत सतह पर फैले हुए होते है। इसलिए सूक्ष्मदर्शी यंत्र से देखने पर इसमें लंबवत एक समान लंबी-लंबी धाराएं दिखाई देती है। इस प्रकार इस का आपेक्षिक घनत्व 2.65 होता है। मूंगे पर हाइड्रोक्लोरिक ऐसिड अम्ल डालने पर झांग उठते हैं। मूंगे को यदि तपाई हुई जब से स्पर्श किया जाए तो उसमें ऐसी दुर्गंध निकलती जैसे मानो बालों के जलाने पर निकलती है।
नकली मूंगा -:
नकली मूंगा कांच या प्लास्टिक का बना होता है किंतु असली मूंगा ही बहुत कम मूल्य मेंआसानी मिल जाता है।इसलिए नकली मूंगा बहुत कम बनाया जाता है क्योंकि असली मूगा ही बहुत कम मूल्य पर बाजार में उपलब्ध हो जाता है। फिर भी नकली मंगा जो कांच या प्लास्टिक का बनाया जाता है। वह असली मूंगे की अपेक्षा अधिक भारी होता है। इसको घिसने पर कांच के सामान आवाज स्पष्ट सुनाई पड़ती है। लेंस से देखने पर कृत्रिम तरह से बनाई गई धारिया स्पष्ट रूप से टेडी मेडी दिखाई पड़ती है।
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एस्ट्रोलॉजर आचार्य केके शास्त्री
वैदिक ज्योतिष शोध संस्थान
चौथ का बरवाड़ा, सवाई माधोपुर
राजस्थान 9414 6572 45
| एस्ट्रोलॉजर आचार्य केके शास्त्री |
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