शुक्र का द्वादश भावों में फल -:
नीचे शुक्र ग्रह के कुंडली के 1 से 12 भावों में स्थित होने पर मिलने वाले शुभ एवं अशुभ फलों का क्रमबद्ध वर्णन दिया जा रहा है।
(यह फल शुक्र की राशि, युति, दृष्टि, बल–निर्बलता के अनुसार घट–बढ़ सकते हैं)
प्रथम भाव (लग्न भाव) में शुक्र -:
शुभ फल:
आकर्षक व्यक्तित्व, सुंदर काया
कला, संगीत, फैशन, अभिनय में रुचि
दांपत्य जीवन सुखमय
समाज में लोकप्रियता
अशुभ फल:
अधिक भोग-विलास से स्वास्थ्य हानि
कामुकता या आलस्य की प्रवृत्ति
आत्मकेंद्रित स्वभाव
द्वितीय भाव (धन भाव) में शुक्र -:
शुभ फल:
धन-संपत्ति, विलासपूर्ण जीवन
मधुर वाणी
पारिवारिक सुख
कला या व्यवसाय से आय
अशुभ फल:
अधिक खर्चीला स्वभाव
मीठा अधिक खाने से स्वास्थ्य समस्या
परिवार में विलासिता के कारण मतभेद
तृतीय भाव (पराक्रम भाव) में शुक्र -:
शुभ फल:
लेखन, मीडिया, कला में सफलता
छोटे भाई-बहनों से सहयोग
साहस के साथ सौम्यता
अशुभ फल:
पराक्रम में कमी
प्रेम संबंधों में अस्थिरता
प्रयासों में आलस्य
चतुर्थ भाव (सुख भाव) में शुक्र -:
शुभ फल:
वाहन, भवन, ऐश्वर्य
माता से सुख
गृह-सज्जा, विलासपूर्ण निवास
अशुभ फल:
भौतिक सुखों की अधिक लालसा
माता के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव
मानसिक असंतोष
पंचम भाव (बुद्धि व संतान भाव) में शुक्र -:
शुभ फल:
तीव्र सौंदर्यबोध
प्रेम विवाह के योग
संतान सुख
रचनात्मक बुद्धि
अशुभ फल:
प्रेम में धोखा
संतान से चिंता
भोग-विलास में अधिक लिप्तता
षष्ठ भाव (रोग व शत्रु भाव) में शुक्र -:
शुभ फल:
शत्रुओं पर विजय
सेवा क्षेत्र में सफलता
सौम्यता से विवाद सुलझाना
अशुभ फल:
गुप्त रोग
प्रेम संबंधों में बाधा
कर्ज या विवाद
सप्तम भाव (विवाह भाव) में शुक्र -:
शुभ फल:
अत्यंत सुंदर व प्रेमपूर्ण जीवनसाथी
वैवाहिक सुख
व्यापार में लाभ
आकर्षण व लोकप्रियता
अशुभ फल:
विवाहेतर संबंध
अत्यधिक कामुकता
दांपत्य में अस्थिरता
अष्टम भाव (आयु व रहस्य भाव) में शुक्र -:
शुभ फल:
गूढ़ विद्याओं में रुचि
जीवनसाथी से धन
अचानक लाभ
अशुभ फल:
गुप्त प्रेम संबंध
यौन रोग
दांपत्य जीवन में तनाव
नवम भाव (भाग्य भाव) में शुक्र -:
शुभ फल:
सौभाग्य में वृद्धि
गुरु व स्त्री का सहयोग
धर्म के साथ सौंदर्य का समन्वय
अशुभ फल:
धर्म में दिखावा
विलासिता के कारण भाग्य क्षीण
पिता से मतभेद
दशम भाव (कर्म भाव) में शुक्र -:
शुभ फल:
कला, फैशन, फिल्म, होटल उद्योग में सफलता
उच्च पद
समाज में मान-सम्मान
अशुभ फल:
कार्यक्षेत्र में प्रेम संबंध
निर्णय में भावुकता
विलासिता से कर्म बाधित
एकादश भाव (लाभ भाव) में शुक्र -:
शुभ फल:
धन, मित्र, स्त्री से लाभ
इच्छाओं की पूर्ति
सामाजिक नेटवर्क मजबूत
अशुभ फल:
गलत मित्र
अनैतिक लाभ
अधिक भोग की प्रवृत्ति
द्वादश भाव (व्यय व मोक्ष भाव) में शुक्र -:
शुभ फल:
विदेश यात्रा
आध्यात्मिक प्रेम
विलासपूर्ण जीवन विदेश में
अशुभ फल:
अत्यधिक खर्च
गुप्त संबंध
भोग में फँसाव, मोक्ष में बाधा
निष्कर्ष -:
शुक्र यदि शुभ, स्वगृही, उच्च या केंद्र-त्रिकोण में हो तो जातक को
सौंदर्य, प्रेम, धन, सुख और कला प्रदान करता है।
यदि नीच, पाप दृष्ट या पाप युति में हो तो
भोग-विलास, रोग, संबंधों में समस्या देता है।

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