Kundli Milan mein bhakut dosh ka vichar

   भकूट दोष को विवाह कुंडली मिलान में इस प्रकार समझें -::

1. भकूट दोष कैसे बनता है?

वर और वधू की चंद्र राशियों के बीच संबंध देखा जाता है। यदि चंद्र राशियों की स्थिति निम्न प्रकार हो तो सामान्यतः भकूट दोष माना जाता है:

राशि संबंध

नाम

सामान्य मान्यता

2–12

द्विद्वादश

आर्थिक/पारिवारिक असामंजस्य

5–9

नव-पंचम

संतान एवं विचारों से जुड़े मतभेद

6–8

षडाष्टक

स्वास्थ्य, तनाव एवं वैवाहिक संघर्ष

उदाहरण:

यदि लड़के की चंद्र राशि मेष और लड़की की वृश्चिक है, तो दोनों में 6–8 का संबंध बनता है, इसलिए षडाष्टक भकूट दोष माना जाएगा।

2. भकूट दोष के अंक

अष्टकूट मिलान में भकूट के 7 अंक होते हैं। दोष होने पर सामान्यतः ये 7 अंक नहीं मिलते।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भकूट दोष = विवाह निश्चित रूप से खराब। यह केवल एक घटक है।

3. भकूट दोष कब समाप्त/निरस्त माना जाता है?

परंपरागत ज्योतिष में कई भकूट दोष परिहार बताए जाते हैं। विशेष रूप से:

वर-वधू की चंद्र राशि के स्वामी एक ही ग्रह हों।

दोनों चंद्र राशियों के स्वामी आपस में मित्र हों।

कुंडली में सप्तम भाव और सप्तमेश मजबूत हों।

गुरु, शुक्र तथा चंद्रमा शुभ स्थिति में हों।

अन्य कूटों में अच्छा मिलान हो।

कुछ परंपराओं में नाड़ी और भकूट दोष के परिहार के विशेष नियम भी माने जाते हैं।

इसलिए केवल “भकूट दोष है, विवाह नहीं हो सकता” कहना सही नहीं है।



इस प्रकार हमने भ कुट दोष को समझने का प्रयास किया है फि

वर और वधू की चंद्र राशि के बीच की दूरी देखी जाती है। मुख्य रूप से 6-8, 5-9 और 2-12 संबंध को भकूट दोष की श्रेणी में माना जाता है।

इनमें 6-8 (षडाष्टक) को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसका संबंध वैवाहिक जीवन, आपसी सामंजस्य, स्वास्थ्य और पारिवारिक परिस्थितियों से जोड़ा जाता है।

लेकिन केवल भकूट दोष देखकर विवाह का निर्णय नहीं करना चाहिए। नाड़ी, गण, ग्रह मैत्री, लग्न, सप्तम भाव, सप्तमेश और शुक्र/गुरु आदि का भी विचार आवश्यक है।


 भकूट के 7 अंक समझने के लिए सबसे आसान तरीका है कि वर और वधू की चंद्र राशियों के बीच की दूरी गिनी जाए।

12 राशियों की क्रम-सूची

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

भकूट दोष की मुख्य तालिका

संबंध

उदाहरण

भकूट

1–1

मेष–मेष

दोष नहीं

2–12

मेष–वृषभ

दोष

3–11

मेष–मिथुन

दोष नहीं

4–10

मेष–कर्क

दोष नहीं

5–9

मेष–सिंह

दोष

6–8

मेष–कन्या

दोष

7–7

मेष–तुला

दोष नहीं

यह संबंध उल्टी दिशा में भी समान रूप से लागू होता है। यानी 2–12, 5–9 और 6–8 को पारंपरिक रूप से भकूट दोष के प्रमुख संबंध माना जाता है।

 भकूट के 7 अंक

अष्टकूट मिलान में कुल 36 गुण होते हैं और उनमें:

वर्ण — 1

वश्य — 2

तारा — 3

योनि — 4

ग्रह मैत्री — 5

गण — 6

भकूट — 7

नाड़ी — 8

कुल = 36 गुण

इसलिए भकूट में 7 अंक मिलना महत्वपूर्ण है, लेकिन विवाह का निर्णय केवल 7 अंकों के आधार पर नहीं करना चाहिए।

 आचार्य कौशल कुमार शास्त्री

9414657245




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