Navgrahon ke Ratan -:
वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रहों (नवग्रह) है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार प्रत्येक रत्न संबंधित ग्रह की शुभ शक्ति को बढ़ाने के लिए धारण किया जाता ह
माणिक्य
सूर्य
आत्मविश्वास, नेतृत्व, प्रतिष्ठा, साहस और पिता/अधिकारी पक्ष से संबंधित शुभता
मोती
चंद्र
मन की शांति, भावनात्मक स्थिरता, मानसिक संतुलन और मातृ-सुख
मूंगा
मंगल
साहस, ऊर्जा, पराक्रम, आत्मबल और कार्य करने की क्षमता
पन्ना
बुध
बुद्धि, वाणी, गणना, व्यापार, शिक्षा और संचार
पुखराज
गुरु
ज्ञान, धर्म, शिक्षा, विवाह, संतान और समृद्धि
हीरा
शुक्र
प्रेम, दांपत्य, कला, सौंदर्य, भौतिक सुख और विलासिता
नीलम
शनि
अनुशासन, कर्म, धैर्य, स्थिरता और कठिन परिस्थितियों से निपटने की क्षमता
गोमेद
राहु
भ्रम/अनिश्चितता से निपटने, एकाग्रता और अचानक आने वाली परिस्थितियों में स्थिरता की पारंपरिक मान्यता
लहसुनिया
केतु
आध्यात्मिकता, वैराग्य, अंतर्ज्ञान और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा की पारंपरिक मान्यता
सबसे महत्वपूर्ण बात
सिर्फ राशि देखकर नवरत्नों में से कोई रत्न पहन लेना उचित ज्योतिषीय नियम नहीं माना जाता। पारंपरिक वैदिक ज्योतिष में रत्न का चयन लग्न, ग्रहों की स्थिति, भाव, ग्रहों की शक्ति और दशा देखकर किया जाता है। विशेष रूप से नीलम, गोमेद और लहसुनिया जैसे रत्नों को बिना कुंडली देखे धारण करने से बचने की सलाह दी जाती है।
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आचार्य कौशल कुमार शास्त्री
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