शादी की उम्र पता करना

शादी की उम्रका विश्लेषण -:

नमस्कार मित्रों!
 आज हम एक महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने जा रहे हैंआज की हमारी चर्चा का विषय है वैदिक ज्योतिष से हम मैरिज का उम्र कैसे निकालते हैं तो  आज हम इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हैंl

वैदिक ज्योतिष में विवाह की उम्र निकालने के लिए केवल 7वाँ भाव देखना पर्याप्त नहीं माना जाता। एक समग्र विश्लेषण में कई स्तरों को मिलाकर देखा जाता है।

विवाह की उम्र देखने के मुख्य आधार
7वाँ भाव (विवाह भाव)
7वें भाव में कौन-सी राशि है, कौन-से ग्रह स्थित हैं और उस पर किन ग्रहों की दृष्टि है—यह सबसे पहले देखा जाता है।

7वें भाव का स्वामी
7वें भाव का स्वामी किस भाव में है, किस राशि में है, उसकी शक्ति कैसी है और किन ग्रहों से संबंध है—इससे विवाह के समय और परिस्थितियों के संकेत मिलते हैं।

शुक्र ग्रह


पुरुष की कुंडली में शुक्र को विवाह का प्रमुख कारक माना जाता है। शुक्र की स्थिति, बल, दृष्टि, युति और दशा का विशेष महत्व होता है।

गुरु ग्रह


स्त्री की कुंडली में गुरु को पति/विवाह का प्रमुख कारक माना जाता है। आधुनिक वैदिक ज्योतिष में दोनों कुंडलियों में गुरु और शुक्र दोनों का परीक्षण किया जाता है।

नवांश कुंडली (D-9)



विवाह के मामले में नवांश अत्यंत महत्वपूर्ण है। D-1 में दिखाई देने वाले विवाह संकेतों की पुष्टि D-9 से की जाती है।


विंशोत्तरी दशा और अंतर्दशा


विवाह कब होगा, इसका समय निर्धारित करने में 7वें भाव के स्वामी, शुक्र, गुरु तथा विवाह से संबंधित ग्रहों की महादशा/अंतर्दशा विशेष रूप से देखी जाती है।


गोचर



विशेषकर गुरु और शनि के गोचर को दशा के साथ मिलाकर देखा जाता है। केवल गोचर के आधार पर विवाह की निश्चित तारीख निकालना उचित नहीं माना जाता।


2रा और 11वाँ भाव
2रा भाव परिवार बनने तथा 11वाँ भाव इच्छा/प्राप्ति से संबंधित होने के कारण विवाह के फल की पुष्टि में देखे जाते हैं

।

उपपद लग्न 



जैमिनी ज्योतिष में उपपद लग्न विवाह और जीवनसाथी से संबंधित महत्वपूर्ण अतिरिक्त संकेत देता है।
विवाह की उम्र कैसे तय की जाती है?
सभी संकेतों को मिलाकर सामान्यतः यह देखा जाता है कि कुंडली में विवाह के योग:
शीघ्र विवाह की ओर हैं,
सामान्य उम्र में विवाह की ओर हैं, या
विलंबित विवाह की ओर हैं।
फिर दशा-अंतर्दशा और गोचर को मिलाकर संभावित विवाह-वर्ष या उम्र की अवधि निकाली जाती है। ज्योतिष से इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय संभावित समय-खिड़की के रूप में लेना अधिक उचित h

Aacharya Kaushal Kumar Shastri 
9414657245


Post a Comment

0 Comments