धूम ग्रह राहु का द्वादश भावों में फल _:
राहु के द्वादश (१२) भावों में फल विषयक विवेचन ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि राहु एक छाया ग्रह है और इसका फल अन्य ग्रहों से भिन्न, रहस्यमय, अचानक, और भ्रमपूर्ण होता है। राहु जिस भाव में स्थित होता है, वहाँ अतिरेक, असामान्यता, धोखा, अथवा विदेशी तत्व का प्रभाव देता है। नीचे राहु के द्वादश भावों में स्थित होने पर संभावित फल दिए जा रहे हैं:।
1. प्रथम भाव (लग्न) में राहु
- व्यक्ति स्वाभाव से रहस्यमयी, आत्मकेन्द्रित, महत्वाकांक्षी होता है।
- स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव, मानसिक अस्थिरता, भ्रम की प्रवृत्ति हो सकती है।
- वाणी और व्यवहार में चालाकी, परन्तु सामाजिक रूप से प्रभावशाली भी हो सकता है।
- यदि शुभ दृष्टि या योग हो, तो व्यक्ति विदेशी संपर्कों से लाभ प्राप्त कर सकता है।
2. द्वितीय भाव में राहु
- वाणी में कटुता या चालाकी, झूठ बोलने की प्रवृत्ति।
- पारिवारिक जीवन में अशांति, वंश परंपरा से दूरी।
- धन अर्जन असामान्य साधनों से हो सकता है (जैसे शेयर मार्केट, सट्टा, तकनीकी क्षेत्र आदि)।
- यदि शुभ योग हों, तो व्यक्ति को अचानक धन लाभ हो सकता है।
3. तृतीय भाव में राहु
- साहसी, चतुर, लेकिन कभी-कभी अविवेकपूर्ण निर्णय लेने वाला।
- भाइयों से मतभेद या दूरी, परंतु विदेश यात्रा के योग प्रबल।
- राजनीति, मीडिया, संचार या गुप्तचर सेवा में सफलता मिल सकती है।
- गुप्त शत्रु सक्रिय हो सकते हैं।
4. चतुर्थ भाव में राहु
- माता से दूरी या माता के स्वास्थ्य में बाधा।
- घरेलू जीवन में अस्थिरता, बार-बार स्थान परिवर्तन।
- वाहन, संपत्ति आदि में बाधा या विवाद।
- विदेशी भूमि में संपत्ति बनाने की संभावना।
5. पंचम भाव में राहु
- संतान सुख में बाधा या संतान से अलगाव।
- बुद्धि, विचार और रचनात्मकता में अनोखापन, लेकिन भ्रम भी संभव।
- प्रेम संबंधों में धोखा या छुपा हुआ संबंध।
- शिक्षा में रुकावट या बार-बार दिशा परिवर्तन।
6. षष्ठ भाव में राहु
- शत्रुओं पर विजय, रोगों से लड़ने की शक्ति।
- वैद्यकीय, अनुसंधान, पुलिस, या रहस्यमय क्षेत्रों में सफलता।
- कर्जों या मुकदमों से ग्रस्त जीवन, लेकिन विजय भी संभव।
- अच्छा योग होने पर व्यक्ति अपने शत्रुओं को चौंका सकता है।
7. सप्तम भाव में राहु
- वैवाहिक जीवन में धोखा, विलंब, अथवा असामान्य विवाह।
- जीवनसाथी विदेशी या भिन्न संस्कृति से हो सकता है।
- व्यापार में चालाकी, लेकिन साझेदारी में सावधानी जरूरी।
- यदि राहु शुभ दृष्ट हो, तो विवाह से लाभ हो सकता है।
8. अष्टम भाव में राहु
- दुर्घटना, मृत्यु का भय, रहस्यमय समस्याएँ।
- गूढ़ विद्या, तंत्र, ज्योतिष, अनुसंधान आदि में रुचि।
- जीवन में अचानक परिवर्तन और उतार-चढ़ाव।
- गुप्त धन या विरासत से लाभ संभव।
9. नवम भाव में राहु
- धर्म के प्रति विद्रोही प्रवृत्ति, परंपराओं से भिन्न विचार।
- गुरु से मतभेद या गलत मार्गदर्शन।
- विदेश यात्रा का योग, विदेशी धर्म/संप्रदाय की ओर आकर्षण।
- भाग्य में प्रारंभ में बाधा, बाद में सुधार।
10. दशम भाव में राहु
- करियर में अचानक परिवर्तन, उन्नति या पतन दोनों की संभावना।
- राजनीति, फिल्म, तकनीकी, गुप्तचर, विदेशी कंपनियों में सफलता।
- व्यक्ति अत्यंत महत्वाकांक्षी और चालाक होता है।
- यदि शुभ दृष्ट हो, तो प्रसिद्धि और यश प्राप्त होता है।
11. एकादश भाव में राहु
- धन, लाभ, इच्छाओं की पूर्ति में सफलता।
- मित्रों के माध्यम से लाभ, लेकिन मित्रता में धोखा भी संभव।
- असामान्य साधनों से धन की प्राप्ति।
- बहुत महत्वाकांक्षी, योजनाशील और चतुर व्यक्ति होता है।
12. द्वादश भाव में राहु
- खर्चों में अतिरेक, विदेश यात्रा या प्रवास का योग।
- गुप्त व्याधियों, मानसिक तनाव या जेल का भय।
- आध्यात्मिक प्रवृत्ति या तंत्र-मंत्र में रुचि।
- यदि शुभ ग्रहों से युक्त हो, तो परदेस में स्थायित्व या मोक्ष की ओर झुकाव।
नोट -
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