प्रदोष व्रत का महत्व -: प्रदोष व्रत भगवान और माता Parvati की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की संध्या (प्रदोष काल) में किया जाता है। प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व भगवान शिव की विशेष क…
Read moreकेतु का द्वादश भाव में शुभ अशुभ फल -: नमस्कार साथियों! आज की चर्चा में हम जानेंगे केतु देव का पत्रिका के द्वादश भाव में शुभ अशुभ परिणाम के विषय में तो आईए जानते हैं केतु देव पत्रिका के सभी भाव में किस प्रकार का सामान्य परिणाम प्रदान करते हैं! जैसा कि हम जान…
Read moreबुध रत्न पन्ना की संपूर्ण विस्तृत जानकारी -: जैसा कि हम सब जानते हैं कि बुद्धदेव का प्रतिनिधित्व पन्ना रत्न करता है। जन्म कुंडली में बुद्धदेव योग कारक की स्थिति में होते हैं तो उस स्थिति में बुध को बलवान बनाने के लिए पन्ना रत्न धारण किया जाता है। पन्ना रत्न…
Read moreनव लक्ष्मी योग -: जिन जातकों की जन्मकुंडली में एकादश भाव का स्वामी केंद्र में हो और एकादश भाव को देखता हो लग्नेश एकादश भाव में हो तथा नवमेश नवम भाव में स्थित हो तो नवलक्ष्मी महायोग का निर्माण होता है। जिनकी जन्म कुंडली में इस योग का निर्माण होता है। वह अटूट …
Read moreस्त्री पुरुष अंग स्फुरण फल विचार -: पुरुष का सदैव दक्षिण भाग व स्त्री का बाम भाग का फड़कना या स्फुरण करना शुभ शगुन दायक होता है। अतः आज हम इसी विषय को लेकर शास्त्र वर्णित स्त्री पुरुष के अंग स्फुरणफल के बारे में जानते हैं। इस प्रकार पुरुष का दाया भाग व स्त्र…
Read moreगाल पर तिल का होना शुभाशुभ फल विचार शरीर पर तिलादि चिन्हों का शुभाशभ फल विचार -: हमारे शरीर पर तिलादि चिन्हों का विशेष शुभाशभ फल ज्योतिष शास्त्र में वर्णित है। तो आइए आज हम शरीर पर तिल आदि चिन्हों के शुभाशुभ ता के विषय में विस्तार से अध्ययन करते हैं। स्तन प…
Read moreमंगल ग्रह रत्न मूंगा की संपूर्ण विस्तृत जानकारी -: मूंगा रत्न के फायदे नमस्कार मित्रों! आज हम नौ ग्रहों के रत्न प्रसंग में मंगल देव का प्रतिनिधित्व करने वाले रत्न मूंगा के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने जा रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में मूंगा मंगल देव क…
Read moreचोरी हुई वस्तु की प्राप्ति व चोर का ज्ञान करना -: यदि किसी पृश्चक की वस्तु चोरी हो जाती है और वह ज्योतिषी से आकर अपनी वस्तु की प्राप्ति प्राप्ति व चौर के विषय में जानना चाहता है तो उसके लिए ज्योतिषी को चाहिए कि वह तत्कालीन लग्न का निर्माण करें और तत्कालीन प्…
Read moreतुला लग्न जन्म कडली सामान्य फल विचार -: १, तुला लग्न की जन्म कुंडली में शनी योगकारक हो जाता है। क्योंकि शनि तुला लग्न की जन्म कुंडली में चतुर्थ भाव का स्वामी होकर सुखेश बनता है और साथ ही पंचम भाव का अधिपति होने के कारण योगकारक होता है क्योंकि दोनों ही भाव जन…
Read moreप्रत्येक मनुष्य के हाथ की रेखाओं में उसका भूत भविष्य वर्तमान छिपा हुआ होता है लेकिन उसको समझने व देखने के लिए हमें ज्योतिष शास्त्र के ज्ञान की आवश्यकता होती है अतः हस्तरेखा को पढ़ने से पहले हमें हस्तरेखा ज्योतिष विद्या का संपूर्ण ज्ञान प्राप्त करना अति आवश…
Read moreहस्तरेखा शास्त्र में अंगुलियों का सर्वश्रेष्ठ स्थान होता है प्रत्येक प्राणी की अंगुलियां भिन्न भिन्न प्रकार की होती है किसी की अंगुलियां लंबी तो किसी की छोटी होती है तथा अंगुलियों का हमारी हथेली से कोई संबंध नहीं होता है अर्थात हमारी हथेली की लंबाई से …
Read moreप्रत्येक प्राणी की हस्त रेखा मे उसका भूत भविष्य वर्तमान छिपा हुआ होता है यहां तक कि हस्त रेखाओं में प्राणी का भूत भविष्य वर्तमान ही नहीं अपितु उस प्राणी का चरित्र भी छिपा हुआ होता है जिसकी जानकारी हम तभी प्राप्त कर सकते हैं जब हमें हस्त रेखाओं का संपूर्ण…
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