निर्जला एकादशी का महत्व -: निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इसका वर्णन महाभारत तथा पद्म पुराण में मिलता है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। मान्यता है कि जो व्यक्ति व…
Read moreअधिक मास की सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व -: जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यदि यह अमावस्या अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में आए, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। वैदिक और पुराणिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन पितृ तर्पण, भ…
Read moreअधिक मास स्नान के नियम -: अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में स्नान के कुछ पारंपरिक नियम और विधियाँ मानी जाती हैं। इस महीने में स्नान, जप, दान और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। अधिक मास स्नान के मुख्य नियम ब्रह्ममुहूर्त में स्नान सूर्योदय से पह…
Read moreगंगा दशमी कब मनाई जाएगी ? वर्ष 2026 में गंगा दशमी (गंगा दशहरा) 25 मई 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। गंगा दशमी क्यों मनाई जाती है? …
Read moreकॉपर एल रोड सेकैसे एनर्जी चेक किया जाता है ? वास्तु में “कॉपर L-रॉड” (Copper L Rods) का उपयोग प्रायः डाउजिंग या ऊर्जा-संवेदन पद्धति के रूप में किया जाता है। यह एक पारंपरिक-अनुभवजन्य विधि है ।, वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह प्रमाणित नहीं मानी जाती, लेकिन अनेक वास…
Read moreमंगल देव काअपनी मूल त्रिकोण मेष राशि में11 म ई से होगा गोचर -: वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल ग्रह 11 मई 2026 को अपनी स्वयं की राशि मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मंगल अपनी स्वराशि में बहुत शक्तिशाली माने जाते हैं, इसलिए यह गोचर साहस, ऊर्जा, नेतृत्व, क्रोध, प्रति…
Read moreनकारात्मक एनर्जी की पहचान कैसे करें पत्रिका में नमस्कार मित्रों आज की चर्चा में हम नेगेटिव एनर्जी के बारे में विस्तार से चर्चा करने जा रहे हैं।आज की चर्चा में हम जानेंगे की पत्रिका में ऐसी कौन से योग होते हैं। जिससे हम पता कर सकते हैं कि हमारी लाइफ में किस …
Read moreअंगारक दोष का पत्रिका में प्रभाव -: नमस्कार मित्रों! आज हम पत्रिका में बनने वाले ऐसे योग के बारे में बात कर रहे हैं जो की बहुत ही बड़ा negativeयोग होता है जिसे अंगारक दोष के नाम से जाना जाता है। जिस पत्रिका में यह दोष बनता है ऐसे जातकों के साथ में मेंटली ब…
Read moreकेतु का द्वादश भाव में शुभ अशुभ फल -: नमस्कार साथियों! आज की चर्चा में हम जानेंगे केतु देव का पत्रिका के द्वादश भाव में शुभ अशुभ परिणाम के विषय में तो आईए जानते हैं केतु देव पत्रिका के सभी भाव में किस प्रकार का सामान्य परिणाम प्रदान करते हैं! जैसा कि हम जान…
Read moreराहु का पत्रिका के 12 भाव में सामान्य फल -: प्रथम भाव व्यक्तित्व में रहस्यमयता, महत्वाकांक्षा, असामान्य सोच स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव, मानसिक बेचैनी विदेश/अलग संस्कृति से जुड़ाव प्रसिद्धि अचानक मिलती है द्वितीय भाव धन अर्जन के अनोखे स्रोत वाणी में कटुता/चा…
Read moreभृगु संहिता में सेकंड मैरिज योग-: नमस्कार मित्रों। आज की चर्चा में हम भृगु संहिता में वर्णित सेकंड मैरिज योग के बारे में विस्तार से चर्चा करने जा रहे हैं। आज की चर्चा में जानेंगे की पत्रिका में सेकंड मैरिज योग किस प्रकार निर्मितहोत है। जैसा कि हम सब जानते ह…
Read more5 दिसंबर से बृहस्पति के वक्री होकर मिथुन राशि में गोचर का सभी 12 राशियों पर प्रभाव -: गुरु अपनी उच्च कर्क राशि से वक्री होकर 5 दिसंबर से मिथुन राशि में गोचर करने जा रहे हैं। इससे पहले 18 अक्टूबर 2025 को बृहस्पति अतिचार होकर मिथुन राशि से अपनी उच्च कर्क …
Read moreशनि मार्गी – 28 नवंबर का 12 राशियों पर प्रभाव नमस्कार मित्रों जैसा कि हम जानते हैं 28 नवंबर 2025 को शनि देव मीन राशि में वक्री गति छोड़कर के मार्गी गति पर आगे बढ़ेंगे। शनिदव की गति परिवर्तन पर सभी 12 राशियों के जातकों के जीवन में भिन्न-भिन्न प्रकारक परिणाम…
Read moreपैतृक संपत्ति से संबंधित विवाद को समाप्त करने का ज्योतिषीय उपाय -: पैतृक संपत्ति में अपना वाजिब भाग प्राप्त करना केवल कानूनी या पारिवारिक विषय नहीं है — वैदिक ज्योतिष की दृष्टि से यह पितृ दोष, ग्रह योग, और कर्मफल से भी जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए इसके उपाय …
Read moreकरवाचौथ व्रत 2025 -: करवा चौथ 2025 करवा चौथ व्रत 10अक्टूबर 2024, शुक्रवार को मनाया जाएगा। यह दिन विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए होता है, जो अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए व्रत रखती हैं। यह व्रत विशेषकर उत्तर भारत के राज्यों जैसे उ…
Read moreश्राद्ध कर्म का सक्षेप परिचय -: श्राद्ध कर्म का वर्णन वेद, स्मृति, पुराण और धर्मशास्त्रों में विस्तारपूर्वक किया गया है। यह कर्म पितृऋण की निवृत्ति और पितरों की शांति एवं तृप्ति के लिए किया जाता है। इसका महत्व, विधि और तत्त्वज्ञान इस प्रकार है – १. श्राद्ध…
Read moreमंगल का राशि परिवर्तन -: सितंबर 2025 में मंगल ग्रह का तुला राशि में प्रवेश (गोचर) 13 सितंबर 2025 को रात लगभग 8:18 बजे होगा, जो सभी 12 राशियों पर विभिन्न प्रभाव डाल सकता है—कुछ के लिए लाभदायक, तो कुछ के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। नीचे संक्षेप में सभी राशियों…
Read moreराजनीतिक क्षेत्र में सफलता प्राप्ति के विशेष योग -: राजनीतिक क्षेत्र में लाभ प्राप्ति का योग देखने के लिए कुंडली में विशेष ग्रहों, भावों और योगों का अध्ययन किया जाता है। निम्नलिखित कारक विशेष रूप से राजनीतिक सफलता के लिए देखे जाते हैं: राजनीतिक सफलता के लिए …
Read moreधूम ग्रह राहु का द्वादश भावों में फल _: राहु के द्वादश (१२) भावों में फल विषयक विवेचन ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि राहु एक छाया ग्रह है और इसका फल अन्य ग्रहों से भिन्न, रहस्यमय, अचानक, और भ्रमपूर्ण होता है। राहु जिस भाव में स्थित होता है, वहाँ …
Read moreअग्नि पुराण के अनुसार सभी 15 तिथियों की व्रत विधि और महत्व -: अग्नि पुराण में सभी पंद्रह तिथियों (प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा या अमावस्या तक) के व्रतों का वर्णन पौराणिक, धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से किया गया है। प्रत्येक तिथि का एक विशेष महत्व है, और उन त…
Read more
Social Plugin