लॉटरी योग-: वैदिक ज्योतिष में लॉटरी, देखने के लिए मुख्य रूप से 5वें, 8वें, 9वें और 11वें भाव तथा उनके स्वामियों का विश्लेषण किया जाता है। केवल एक योग के आधार पर लॉटरी मिलने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता; कई योगों का एक साथ होना और अनुकूल दशा-गोचर आवश्यक…
Read moreप्रदोष व्रत का महत्व -: प्रदोष व्रत भगवान और माता Parvati की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की संध्या (प्रदोष काल) में किया जाता है। प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व भगवान शिव की विशेष क…
Read moreआठवां घर का स्वामी बुध जब फिफ्थ हाउस में नीचे का होता है तो उसका रिजल्ट इस प्रकार का सामान्य रूप से देखा जाता है जब आठवें भाव का स्वामी बुध (मिथुन राशि का स्वामी) पंचम भाव में नीच का होकर बैठता है और गोचर में भी बुध पंचम भाव में आकर नीच का हो जाए, तो यह स्…
Read moreवास्तुशास्त्र -: नमस्कार मित्रों । आज हम वास्तु शास्त्र के बारे में सामान्य जानकारी को लेकर के चर्चा करने जा रहे हैं। आज हम जानेंगे किसी भी भवनप्लॉटका निर्माण करने से पहले वास्तु शास्त्र के अनुसार सामान्य रूप से पहले किन-किन चीजों को देखा जाता है क्या उसमें …
Read moreकेमद्रुम दोष का संपूर्ण विवरण -: नमस्कार साथियों आज हम ज्योतिष शास्त्र के ऐसे महत्वपूर्णदोष की बात करने जा रहे हैं जो कि चंद्रमा के द्वारा निर्मित होता है। जिसे केमद्रुम योग के नाम से जाना जाता है।आईए जानते हैं केंमदु दोष के क्या परिणाम होते हैं। किस प्रका…
Read moreकेतु का द्वादश भाव में शुभ अशुभ फल -: नमस्कार साथियों! आज की चर्चा में हम जानेंगे केतु देव का पत्रिका के द्वादश भाव में शुभ अशुभ परिणाम के विषय में तो आईए जानते हैं केतु देव पत्रिका के सभी भाव में किस प्रकार का सामान्य परिणाम प्रदान करते हैं! जैसा कि हम जान…
Read moreराहु का पत्रिका के 12 भाव में सामान्य फल -: प्रथम भाव व्यक्तित्व में रहस्यमयता, महत्वाकांक्षा, असामान्य सोच स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव, मानसिक बेचैनी विदेश/अलग संस्कृति से जुड़ाव प्रसिद्धि अचानक मिलती है द्वितीय भाव धन अर्जन के अनोखे स्रोत वाणी में कटुता/चा…
Read moreशुक्र का द्वादश भावों में फल -: नीचे शुक्र ग्रह के कुंडली के 1 से 12 भावों में स्थित होने पर मिलने वाले शुभ एवं अशुभ फलों का क्रमबद्ध वर्णन दिया जा रहा है। (यह फल शुक्र की राशि, युति, दृष्टि, बल–निर्बलता के अनुसार घट–बढ़ सकते हैं) प्रथम भाव (लग्न भाव) में शुक…
Read more5 दिसंबर से बृहस्पति के वक्री होकर मिथुन राशि में गोचर का सभी 12 राशियों पर प्रभाव -: गुरु अपनी उच्च कर्क राशि से वक्री होकर 5 दिसंबर से मिथुन राशि में गोचर करने जा रहे हैं। इससे पहले 18 अक्टूबर 2025 को बृहस्पति अतिचार होकर मिथुन राशि से अपनी उच्च कर्क …
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