लॉटरी योग-:
वैदिक ज्योतिष में लॉटरी, देखने के लिए मुख्य रूप से 5वें, 8वें, 9वें और 11वें भाव तथा उनके स्वामियों का विश्लेषण किया जाता है।
केवल एक योग के आधार पर लॉटरी मिलने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता; कई योगों का एक साथ होना और अनुकूल दशा-गोचर आवश्यक होता है।
प्रमुख योग इस प्रकार माने जाते हैं:
5वें भाव का संबंध 8वें या 11वें भाव से
5वें भाव का स्वामी 8वें या 11वें भाव में हो।
5वें और 11वें भाव के स्वामियों का युति या दृष्टि संबंध हो।
5वें और 8वें भाव के स्वामियों का संबंध भी अचानक धन का संकेत देता है।
8वाँ भाव मजबूत हो
8वें भाव या उसके स्वामी पर बृहस्पति या शुक्र की शुभ दृष्टि।
8वें भाव का स्वामी उच्च, स्वराशि या केंद्र/त्रिकोण में हो।
11वाँ भाव (लाभ भाव) शक्तिशाली हो
11वें भाव में शुभ ग्रह हों।
11वें भाव का स्वामी बलवान होकर 5वें, 8वें या 9वें भाव से संबंधित हो।
धन योग एवं लक्ष्मी योग
2वें, 5वें, 9वें और 11वें भावों का परस्पर संबंध।
बृहस्पति एवं शुक्र की शुभ स्थिति धन प्राप्ति की संभावना बढ़ाती है।
राहु का प्रभाव
राहु यदि 5वें, 8वें या 11वें भाव में शुभ प्रभाव में हो तो अचानक लाभ की संभावना बन सकती है।
किंतु राहु अकेले शुभ फल नहीं देता; उसे शुभ ग्रहों का समर्थन चाहिए।
दशा और गोचर
5वें, 8वें, 9वें या 11वें भाव के स्वामी की महादशा/अंतर्दशा।
बृहस्पति का लाभ भाव या धन भाव पर शुभ गोचर।
शनि और राहु के अनुकूल गोचर भी अचानक लाभ के अवसर दे सकते हैं।
विशेष संयोजन
5वें भाव का स्वामी 11वें भाव में और 11वें भाव का स्वामी 5वें भाव में (परिवर्तन योग)।
2, 5, 9 और 11 के स्वामियों का संबंध।
8वें भाव का स्वामी 11वें भाव में शुभ ग्रहों से युक्त।
धन योग तथा लक्ष्मी योग का निर्माण।
Kk shastri
9414657245
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