वास्तु शास्त्र का सामान्य नियम

 वास्तुशास्त्र -:

नमस्कार मित्रों ।
आज हम वास्तु शास्त्र के बारे में सामान्य जानकारी को लेकर के चर्चा करने जा रहे हैं। आज हम जानेंगे किसी भी भवनप्लॉटका निर्माण करने से पहले वास्तु शास्त्र के अनुसार सामान्य रूप से पहले किन-किन चीजों को देखा जाता है क्या उसमें शुभ और क्या अशुभ होता है ।इन सभी का  यहां पर चर्चा करते हैं ।


वास्तु शास्त्र चेक करने का विस्तृत वर्णन  -:


वास्तु शास्त्र में किसी घर, दुकान या भूमि की ऊर्जा और दिशा का संतुलन देखा जाता है। इसे चेक करने के लिए निम्न मुख्य बिंदुओं का विश्लेषण किया जाता है:

1. दिशा निर्धारण -:

सबसे पहले कम्पास से सही दिशा (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) निर्धारित की जाती है।
उत्तर और पूर्व दिशाएं शुभ मानी जाती हैं
दक्षिण और पश्चिम में भारीपन  रखना अच्छा होता है।


2. प्लॉट का आकार और ढलान -:



वर्गाकार  और आयताकार  प्लॉट सबसे उत्तम
प्लॉट का ढलान उत्तर-पूर्व  की ओर होना चाहिए
दक्षिण-पश्चिम ऊँचा होना चाहिए 


3. मुख्य द्वार &:

मुख्य द्वार उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व में शुभ होता है
दक्षिण-पश्चिम में द्वार अशुभ माना जाता है।



4. कमरों का स्थान -:


(A) पूजा कक्ष 
उत्तर-पूर्व  में होना चाहिए

(B) रसोई 
दक्षिण-पूर्व  सबसे अच्छा
दूसरा विकल्प: उत्तर-पश्चिम

(C) शयन कक्ष 
मुख्य शयन कक्ष: दक्षिण-पश्चिम
बच्चों का कमरा: पश्चिम या उत्तर-पश्चिम

(D) बैठक 
उत्तर या पूर्व दिशा में अच्छा

5. जल स्रोत 
बोरवेल, टंकी, पानी का स्रोत उत्तर-पूर्व में होना चाहिए
ओवरहेड टैंक दक्षिण-पश्चिम में रखना उत्तम

6. शौचालय 
उत्तर-पश्चिम या दक्षिण दिशा में
उत्तर-पूर्व में शौचालय वर्जित है।

7. सीढ़ियां 
दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम में
घड़ी की दिशा में चढ़नी चाहिए।

8. खुला स्थान 
उत्तर और पूर्व में अधिक खुला स्थान
दक्षिण और पश्चिम में कम खुला स्थान


9. ऊर्जा संतुलन 
घर में प्रकाश और वायु का उचित प्रवाह
टूट-फूट, गंदगी और अव्यवस्था न हो।


आचार्य कौशल कुमार शास्त्री
9414657245


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