Pradosh vrat ka mahatva

 प्रदोष व्रत का महत्व -:


प्रदोष व्रत भगवान और माता Parvati की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की संध्या (प्रदोष काल) में किया जाता है।


प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है
मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव अपने भक्तों की प्रार्थनाएँ शीघ्र स्वीकार करते हैं।
पापों का क्षय और पुण्य की प्राप्ति
श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से पूर्व जन्मों तथा वर्तमान जीवन के पापों का नाश होता है।
कष्टों और बाधाओं से मुक्ति
जीवन में आने वाली आर्थिक, पारिवारिक, स्वास्थ्य एवं मानसिक समस्याओं के निवारण हेतु यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है।
मनोकामना पूर्ति
विवाह, संतान, धन, सुख-समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति की कामना से किया गया प्रदोष व्रत शुभ फल प्रदान करता है।
मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है
शिवपुराण के अनुसार प्रदोष व्रत से शिवभक्ति दृढ़ होती है और अंततः मोक्ष की प्राप्ति में सहायता मिलती है।


प्रदोष व्रत में क्या करें?


प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
दिनभर यथाशक्ति उपवास रखें।
संध्या के समय शिवलिंग का जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा आदि से अभिषेक करें।
"ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करें।
शिव चालीसा, रुद्राष्टक या शिवपुराण का पाठ करें।
प्रदोष काल में दीपक जलाकर शिव-पार्वती की आरती करें।
सप्ताह के अनुसार प्रदोष व्रत के विशेष फल
सोम प्रदोष – स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति।
भौम प्रदोष – ऋण, रोग और शत्रु बाधा से मुक्ति।
बुध प्रदोष – बुद्धि और व्यापार में सफलता।
गुरु प्रदोष – ज्ञान और सौभाग्य की वृद्धि।
शुक्र प्रदोष – वैवाहिक सुख और समृद्धि।
शनि प्रदोष – शनि दोष शांति और कष्टों का निवारण।
रवि प्रदोष – आयु, यश और प्रतिष्ठा की प्राप्ति।
वैदिक परंपरा में प्रदोष व्रत को शिवभक्ति, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अत्यंत प्रभावशाली साधन माना गया है।॥ हर हर महादेव ॥


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