प्रत्येक मनुष्य के हाथ की रेखाओं में उसका भूत भविष्य वर्तमान छिपा हुआ होता है लेकिन उसको समझने व देखने के लिए हमें ज्योतिष शास्त्र के ज्ञान की आवश्यकता होती है अतः हस्तरेखा को पढ़ने से पहले हमें हस्तरेखा ज्योतिष विद्या का संपूर्ण ज्ञान प्राप्त करना अति आवश्यक होता है क्योंकि जब हमें हस्तरेखा शास्त्र का सूक्ष्म से सूक्ष्म ज्ञान प्राप्त होगा तभी जाकर के हम हस्तरेखा को पढ़कर उनका सटीक फलादेश कह सकते हैं तो आइए आज हम इसी विषय को लेकर चर्चा करते हैं कि मानव हस्त रेखाओं को कितने भागों में बांटा गया है व किस रेखा को क्या नाम दिया गया है
हस्त रेखाओं के प्रकार -:"
मानव के हाथ की रेखाओं को मुख्य रूप से सात भागों में बांटा गया है क्योंकि प्रत्येक मानव के हाथ में सात रेखाएं प्रधान होती है जिनके द्वारा हम मनुष्य के भूत भविष्य वर्तमान का हस्त रेखा शास्त्र के अध्ययन द्वारा ज्ञान कर सकते हैं तो आइए जानते हैं कि वे कौन-कौन सी सात प्रमुख रेखाएं हैं
1.जीवन रेखा -: जीवन रेखा शुक्र क्षेत्र को घेरे रखती है और इसके द्वारा हम हमारे जीवन की आयु का निर्धारण करते है
2.मस्तक रेखा -: मस्तक रेखा करतल के मध्य में एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाती है और इस रेखा के द्वारा हम हमारी बौद्धिक शक्ति का परीक्षण करते हैं
3. हदय रेखा -: यह रेखा अंगुलियों के मूल स्थान के नीचे मस्तक रेखा के बराबर चलती है और यह रेखा हमारे हाथ में एक महत्वपूर्ण रेखा होती है
4. शुक्र मुद्रिका -: शुक्र मुद्रिका का रेखा हृदय रेखा के ऊपर होती है तथा अधिकतर सूर्य तथा शनि क्षेत्र को घेरे रहती है
5. स्वास्थ्य रेखा -: स्वास्थ्य रेखा बुध क्षेत्र से प्रारंभ होकर हाथ के नीचे की ओर चली जाती है और इससे हम हमारे जीवन में स्वास्थ्य का परीक्षण करते हैं
6. सूर्य रेखा -: सूर्य रेखा हथेली के बीच भाग से प्रारंभ होकर हाथ में नीचे की और होती है
7. भाग्य रेखा -: यह रेखा हाथ के मध्य में होती हुई मणिबंध से आरंभ होकर शनी क्षेत्र तक जाती है
इस प्रकार इन सात रेखाओं के साथ-साथ कुछ सहयोगी रेखाएं भी होती है जो इस प्रकार है
1.मंगल रेखा -:यह प्रथम मंगल क्षेत्र से प्रारंभ होकर जीवन रेखा के अंदर के बाहर तक जाती है
2.वासना रेखा -: यह स्वास्थ्य रेखा के समानांतर रहती है
3. अतेद्रीय रेखा -:यह अर्धवृत्त के रूप में बुध क्षेत्र से आरंभ होकर चंद्र क्षेत्र तक जाती है
4. विवाह रेखा -: यह रेखा बुध क्षेत्र पर एक छोटी आड़ी रेखा के रूप में होती है
5. तीन मणिबंधरेखाएं -: यह मणिबंध पर होती है
- : मनुष्य का हाथ और गृह क्षेत्र -:
हर मनुष्य का हाथ अपने गृह क्षेत्र के साथ ही उसके भाग्य का निर्णय करता है प्राणी की हस्त रेखा जो देखने में तो बहुत ही साधारण लगती है किंतु यदि ज्योतिष विद्या की दृष्टि से पढ़ा जाए तो उन रेखाओं में तो प्राणी का सारा भूत भविष्य वर्तमान छिपा हुआ होता है इस प्रकार यद्यपि हस्त रेखाएं हमें देखने में साधारण लगती है किंतु जो हस्त रेखाओं को पढ़ना जानता है उनके लिए वे रेखाएं उस प्राणी के भूत भविष्य वर्तमान को बोलने वाली होती है हमारी हथेली की रेखाओं के हाथ का पिछला ग्रह क्षेत्र या पर्वत प्रजातियों इन जातियों के संदर्भ में या तुलना में उतरी देशों के गृह क्षेत्र से अधिक ध्यान देने योग्य होते हैं यही इनकी विशेषता रही है
हाथ के इन पर्वतों के नाम भी उन्हीं प्रमुख ग्रहों के नाम रखे गए हैं वहीं गृह हमारी भाग्य का निर्णय करते हैं यह ग्रह हैं सूर्य चंद्र शुक्र बुध मंगल गुरु शनि तो आइए हम इन पर्वत ग्रहों के फलादेश के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं

शुक्र -:
इस ग्रह का संबंध हमारी इंद्रियों से संबंधित सुख व वासना से होता है
मंगल - :
मंगल ग्रह का संबंध हमारी जीवन शक्ति साहस युद्ध व हमारे आत्मबल से जुड़ा हुआ होता है
बुद्ध -:
बुध ग्रह का संबंध हमारी मानसिकता विज्ञान हमारा व्यापार आदि से जुड़ा हुआ होता है
चंद्र -:
चन्द का संबंध हमारी कल्पना प्रेम स्वास्थ्य मानसिक परिवर्तन चिंतन शक्ति इत्यादि से जुड़ा हुआ होता है
सूर्य -:
सूर्य का संबंध हमारी बुद्धि हमारी सफलता असफलता व हमारे जीवन में सुख दुख से जुड़ा हुआ होता है
बृहस्पति -:
बृहस्पति को सभी ग्रहों का गुरु कहा जाता है अर्थात गुरु का अर्थ होता है बड़ा बृहस्पति से हमारी आकांक्षा शासन पद्धति हमारे विचार इत्यादि से संबंध जुड़ा हुआ होता है
शनि -:
शनि ग्रह का नाम सुनते ही लोग डरने लगते हैं शनि ग्रह का अर्थ है दुख संकट चिंता गंभीरता
यह सारे ग्रह राशि मंडल को करीब 16 डिग्री चौड़ा ब्रह्मांड का रास्ता बताया गया है जिसमें यह सब के सब ग्रह घूमते रहते हैं ये 12 राशि में बटे रहते हैं हर राशि 30 डिग्री की होती है और यह सूर्य 30 दिन के पश्चात दूसरी राशि में प्रवेश करता है 12 मास के पश्चात यह 360 डिग्री के राशि मंडल अर्थात 1 वर्ष को पूरा करता है
मंगल पर्वत -:
मंगल पर्वत की हथेली पर दो स्थितियां मुख्य रूप से देखी जाती है इसमें पहला पर्वत जीवन रेखा के ऊपरी भाग के ठीक नीचे तथा दूसरा इसके विपरीत हृदय रेखा या मस्तिक रेखा के बीच वाले स्थान पर पाया जाता है इनमें प्रथम पर्वत शारीरिक विशेषताएं एवं द्वितीय मानसिकता को दर्शाता है यदि प्रथम पर्वत खड़ा हो तो सकारात्मक होता है और यह उस दशा में अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है जब कोई प्राणी 29 मार्च से 29 अप्रैल तक इससे अधिक 28 अप्रैल के बीच में पैदा हुआ हो क्योंकि वर्ष का यह भाग राशि मंडल में मंगल का सकारात्मक क्षेत्र माना जाता है दूसरे भाग को नकारात्मक कहा गया है यह तब महत्वपूर्ण होता है जब प्राणी का जन्म 21 अक्टूबर से 21 नवंबर या इससे अधिक 28 नवंबर तक हुआ हो क्योंकि वर्ष का यह भाग राशि चक्र में मंगल ग्रह का नकारात्मक क्षेत्र माना जाता है जब हम दोनों स्थितियों में अंतर का विचार करेंगे कि वह मन तथा स्वभाव पर कैसे प्रभाव डालते हैं उनका स्वास्थ्य की प्रकृति से क्या संबंध हो सकता है इसे भी हमें ज्ञात करना अति आवश्यक हो जाता है
मंगल का पहला पर्वत -"
मंगल का पहला पर्वत जीवन रेखा के पास ही पाया जाता है जब प्राणी मंगल के क्षेत्र में 21 मार्च से 21 अप्रैल तक या अधिक से अधिक 28 अप्रैल तक जन्म लेता है तो उसका स्वभाव शक्तिशाली एवं लड़ाकू होता है उसमें उद्देश्य एवं निश्चय की दृढ़ता होती है वह सभी आलोचनाओं का उत्तर देते हैं परंतु रूढ़िवादी होते हैं दूसरों की सलाह बहुत कम मानते हैं तथा मनमानी करने में ही उन्हें आनंद प्राप्त होता है उन्हें केवल प्यार से ही अपने पक्ष में किया जा सकता है वैसे ज्योतिष विज्ञान की दृष्टि से ऐसे लोग बहुत ही मिलनसार होते हैं और ऐसे लोगों में भावुकता अधिक होती है परंतु ऐसे अधिकतर लोग नशे के आदी हो जाते हैं
मंगल का दूसरा पर्वत -:
मंगल का दूसरा पर्वत हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा के बीच के स्थान पर पाया जाता है यह उस समय और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है जब कोई प्राणी का जन्म 21 अक्टूबर से 21 नवंबर या अधिक से अधिक 27 नवंबर तक हुआ हो राशि मंडल में इस भाग को मंगल का नकारात्मक क्षेत्र माना जाता है जिस प्राणियों के हाथों में यह क्षेत्र उन्नत होता है वे स्वभाव व चरित्र में पहले प्रकार से बिल्कुल अलग होते हैं उनके मस्तिक में मंगल के सारे गुण भी रहते हैं व मानसिक रूप से काफी साहसी होते हैं उनमें शरीर के बजाय मानसिक साहस अधिक होता है अधिक विकसित बुद्धि ना होने कारण अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं
गुरु पर्वत -:
यह क्षेत्र प्रथम अंगुली के मूल में पाया जाता है यदि यह बड़ा होता है तो शासन करने की भावना पैदा करता है नेतृत्व की व्यवस्था की ओर किसी विशेष उद्देश्य की प्राप्ति की आशा जन्म लेती है किंतु इन संभावनाओं की पूर्ति तभी होती है जब मस्तिक रेखा लंबी एवं स्पष्ट हो यदि यह रेखा पतली या खराब आकार की कहीं से टूटी फूटी हो तो ऐसे हाथ वाले लोग काफी घमंडी अपनी इच्छा से काम करने वाले होते हैं यदि इसमें कोई ऊबार ना हो तो इन्हें सादा ही कहा जाएगा इस पर्वत के उभार को तब सकारात्मक माना जाता है जब प्राणी का जन्म 21 नवंबर से 28 दिसंबर के बीच में हुआ हो ऐसे लोग बड़े बहादुर और अपने कामों में बड़े ही दृढ़ निश्चय वाले होते हैं वह लोग अपना पूरा ध्यान अपने काम की और लगा देते हैं सिद्धांत वादी होने के कारण कभी-कभी गलत लोगों से धोखा भी खा जाते हैं गुरु के उभार को नकारात्मक भी कहा जाता है जब किसी प्राणी का जन्म 19 फरवरी से 20 मार्च या अधिक से अधिक 28 मार्च तक हुआ हो ऐसे लोग सारे विषयों की साधारण जानकारी रखते हैं ज्योतिष भौगोलिक विषय में इनकी रूचि होती है ऐसे लोगों में आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा होता है
शनि पर्वत -:
शनि पर्वत मुख्य रूप से दूसरी अंगुली के बीचो बीच पाया जाता है इसकी विशेषता एकांत प्रियता दूरदर्शिता और गंभीर विषयों का अध्ययन को दर्शाती है इस पर्वत की सर्वथा अनुपस्थिति प्राणी के स्वभाव तथा इसका अधिक उभार उन सारे गुणों की अधिकता की ओर संकेत करता है जो इसके अंदर है सनी के उभार को अच्छा तब माना जाता है जब किसी प्राणी का जन्म 21 दिसंबर से 27 जनवरी के बीच में हुआ हो इन तिथियों में जन्म लेने वाले प्राणी अपनी इच्छाशक्ति और मानसिक शक्ति के लिए काफी प्रसिद्ध होते हैं किंतु इस पर भी वे अपने आप को अलग-थलग महसूस करते हैं इनके अंदर सहानुभूति और दया की भावना होती है जीवन की हर जिम्मेदारी को भी निभाते हैं किसी प्राणी का जन्म 21 जनवरी से 18 फरवरी के मध्य हुआ हो ऐसे लोग हर बात में भाषण देना आरंभ कर देते हैं ऐसे लोग बहुत संवेदनशील होते हैं और भावउक भी बहुत होते हैं इनके मित्र बहुत वफादार होते हैं ऐले लोग अपने मित्रों पर जान दे सकते हैं तथा कला प्रेमी भी होते
सूर्य पर्वत -:
सूर्य पर्वत तीसरी अंगुली अर्थात अनामिका के मूल में पाया जाता है सूर्य पर्वत का अच्छा होने पर यह गरिमा और प्रसिद्धि के साथ-साथ जीवन को उज्जवल बनाता है यह ऐसा पर्वत है जो बड़ा होने पर बहुत ही शुभ माना जाता है ऐसे लोगों का झुकाव कला की ओर अधिक होता है सभी चीजों में सुंदरता की ओर झुकाव का संकेत भी करता है यह पर्वत यदि अधिक बड़ा हो तो ऐसे लोग बहुत ही खर्ची ले होते हैं साथ ही इस प्रकार के लोग मौज मस्ती में अपना समय व्यतीत करने वाले होते हैं परंतु जब प्राणी का जन्म 21 जनवरी से 25 फरवरी के बीच में हुआ होता है तो ऐसे लोगों को धन बहुत कम आकर्षित कर पाता है ऐसे लोग व्यवसाय व धन के मामले में अधिक सफल होते हैं
बुध पर्वत -:
यह पर्वत चौथी अंगुली के मूल में पाया जाता है यदि हाथ अच्छा हो तो इस पर्वत का प्रभाव अच्छा होता है और हाथ से खराब मानसिक प्रवृत्ति का संकेत मिलता है तो उनकी बुराइयां को और अधिक बढ़ा देता है यह अन्य चीजों से अधिक मस्तिक से संबंध रखता है यह मस्तिक बुद्धि विचार और ज्ञान की वर्दी कराता है यह ज्ञान विज्ञान व वाणिज्य की क्षमता भी देता है परंतु यदि खराब स्थिति में हो तो मानसिक उत्तेजना शीघ्र घबराने की आदत एकाग्रता की कमी तथा व्यवसाय में धोखेबाज बनाता है इस पर्वत के संबंध में हाथ में पाई जाने वाली मस्तक रेखा की स्थिति के आधार पर विचार किया जाना चाहिए यदि मस्तिष्क रेखा बड़ी हो तो यह मानसिक क्षमता एवम सफलता की संभावना को बढ़ा देता है परंतु यह रेखा कमजोर खराब आकार की अनियमित हो तो इसके सभी परिणाम कमजोर एवं खराब होते हैं जब किसी प्राणी का जन्म 21 मई से 27 जून के बीच में हुआ हो तो इस अवधि में जन्म लेने वाले लोग राशि मंडल में मिथुन के रूप में माने जाते हैं यह एक चौका देने वाली बात है कि इस अवधिमें जन्म लेने वाले व्यक्तियों का स्वभाव चरित्रवान होता है उनकी प्रकृति तथा चरित्र का एक पहलू दूसरे पहलू का बिल्कुल विरोधी नजर आता है तथा अच्छी बुद्धि होते हुए भी ऐसे लोग अपने उद्देश्य में एकाग्रता की कमी कारण जिंदगी खराब कर लेते हैं जो कुछ भी सोचते हैं अथवा करना चाहते हैं सफल नहीं हो पाते हैं ऐसे लोगों को समझाना बड़ा ही कठिन होता है क्योंकि उनका स्वभाव बहुत ही क्रोधित होता है उनके स्वभाव के कारण लोग उनसे घृणा करने लगते हैं कामकाज के मामले में वे अपने सारे साथियों से आगे निकल जाते हैं परंतु मन वांछित सफलता प्राप्त नहीं कर पाते है जिन लोगों का जन्म 21 अगस्त से 27 सितंबर तक के बीच में हुआ हूं इस अवधि में जन्म लेने वाले प्राणी भौतिकवादी होते हैं इस अवधि में जन्म लेने वाली महिलाएं विशेषताएं जिज्ञासु होती है उनमें एक से अधिक गुण पाए जाते हैं लेकिन साथ में कहीं प्रकार के अवगुण भी होते हैं क्योंकि ऐसे लोग प्राय संकालु वह दूसरे लोगों से घृणा करने वाले अधिक होते हैं
चंद्र पर्वत -:
चंद्र पर्वत मानसिक रेखा के अंत के मूल में पाया जाता है यह पर्वत उन विषयों से संबंध रखता है जो कला यात्रा आविष्कार प्यार एवं आदर्शों से जुड़े हुए हैं इस पर्वत को शुभ तब माना जा सकता है जब यह विकसित दिखाई देता है उस हालात में जब मनुष्य का जन्म 21 जून से 27 जुलाई के बीच में हुआ हो ऐसे लोग शक्तिशाली होते हैं वे जो कुछ कहते हैं कर दिखाते हैं उन्हें स्वयं पर पूरा विश्वास होता है जब यह क्षेत्र हथेली पर उभरा हुआ होकर चपता हो जाता है तो इसे नकारात्मक संज्ञा देते हैं जिस प्राणी का जन्म 21 जनवरी से 27 फरवरी के बीच में हुआ हूं तो उनमें मानसिक शक्ति की बहुत अधिकता होती है परंतु उनकी विचार शक्ति काफी कमजोर होती है उनकी बुद्धि बहुत तीव्र होती है सबके भले की बात सोचते हैं
शुक्र पर्वत -:
अंगूठे के मूल में तथा जीवन रेखा के अंदर वाला भाग शुक्र पर्वत कहलाता है जब यह अच्छी बनावट का हो किंतु अधिक बड़ा ना हो तो यह प्रेम भावना की पूर्ति करने का अधिक इच्छुक होता है इस प्रकार के पर्वत वाले लोग कला के प्रेमी होते हैं साथ ही कलाकार भी बनने की योग्यता रखते हैं जब यह पर्वत ऊंचा और बड़ा होता है तो सकारात्मक होता है और जब यह पर्वत छोटा व चपता हो तो इसे अशुभ कहा जाता है यदि किसी प्राणी का पूरा हाथ सामान्य हो और शुक्र पर्वत अच्छे आकार का हो तो यह शुभ माना जाता है यदि जन्म दिन के हिसाब से इस पर विचार किया जाए तो तो जब प्राणी का जन्म 20 अप्रैल से 27 मई के बीच में हुआ हूं तो ऐसे लोग बड़े धैर्य वान दयालु समाजसेवी स्वभाव वाले होते हैं इसी के साथ जब किसी प्राणी का जन्म 21 सितंबर से 28 अक्टूबर के बीच में हुआ हो तो ऐसे लोग शुक्र के प्रभाव के कारण आगे चलकर के डॉक्टर वकील और जज जैसे पद पर पहुंच पाते हैं
हमारी हस्त रेखाएं और हमारा दैनिक जीवन -:
जैसा कि हम जानते हैं कि हमारी हस्त रेखाओं में हमारा भूत भविष्य वर्तमान छिपा हुआ होता है अतः हम हस्तरेखा ज्योतिष ज्ञान के द्वारा हमारे भूत भविष्य वर्तमान को पढ़ सकते हैं सर्वप्रथम हमारी हस्त रेखा के बारे में यह नियम होता है कि वे साफ और सुअंकित होनी चाहिए और नहीं चौड़ी हो व नहीं उनका रंग* पीला हो वेट टूट फूट रहीत हो !
1.अधिक पीले रंग की रेखाएं अच्छे स्वास्थ्य की कमी का प्रतीक होती है अर्थात हमारी हस्तरेखा अगर पीले रंग की होती है तो ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य कमजोर रहता है
2. यदि यह रेखा लाल रंग की हो तो ऐसा व्यक्ति उत्साही आशावादी परिश्रमी सुस्त और हर समय खुश रहने वाले होते हैं
3.अगर हमारी रेखाएं हल्के पीले रंग की हो तो ऐसे लोगों में प्राकृतिक रूप से अधिक क्रोध होता है इन्हें जिगर रोग लगने की संभावना बहुत अधिक होती है
4.अगर हमारी हस्तरेखा है गहरे रंग की लगभग काली हो तो ऐसे लोग बड़े गंभीर जिद्दी और क्रोधी होते हैं प्रतिशोध की आग में अंधा होकर कभी-कभी किसी का मर्डर तक करने वाले होते हैं
5. जब भी कभी हाथ की परीक्षा करें तो यह बात ध्यान में रखें कि प्राणी के हाथ की रेखाएं नई बनती बिगड़ती रहती है जैसे-जैसे प्राणी की आयु बढ़ती है वैसे-वैसे उसकी कल्पना और सब कुछ बदलता रहता है इस प्रकार हाथ की रेखा भी बनती और बिगड़ती रहती है
जब कोई प्रमुख रेखा जैसे मस्तक रेखा या जीवन रेखा के साथ कोई सहायक रेखा चल रही हो तो प्रधान रेखा को बल मिलता है संकट टल सकता है ऐसे में यदि प्रधान रेखा टूटी हुई हो तो सहायक रेखा उसके दोषों को दूर कर देती है ऐसी किसी भी अन्य रेखा के अपेक्षा जीवन रेखा के साथ अधिक होता है यदि कोई भी रेखा अंत में दो शाखाओं में बट जाती हो तो उस रेखा को अधिक शक्ति मिलती है उदाहरण के लिए मस्तक रेखा पर यदि ऐसा हो तो जातक की मानसिक शक्ति में वृद्धि होगी किंतु ऐसी रेखा वाला व्यक्ति भिन्न स्वभाव वाला भी हो सकता है जब कोई रेखा गपुत्द मे समाप्त होती है तो ऐसा जिस रेखा पर हो उसकी कमजोरी एवं विनाश का प्रतीक समझना चाहिए यदि ऐसा आकार जीवन रेखा के अंत में हो तो व्यक्ति के स्नायु तंत्र कमजोर हो जाते हैं किसी भी रेखा से ऊपर की ओर उठती हुई साकाऐ उस रेखा को शक्ति प्रदान करती है जबकि नीचे जाने वाली शाखाएं ठीक इस से उल्टा फल देने वाली होती है यदि किसी प्राणी शादी की सफलता असफलता पर विचार करना हो तो हृदय रेखा के शुरू में रहने वाले रेखा बहुत विशेष होती है इसमें उठती हुई रेखाएं प्रेम का प्रतीक होती है तथा नीचे जाती हुई विपरीत फल देती है मस्तक रेखा पर ऊपर उठती हुई रेखाएं चतुर आत्मविश्वास लोगों की भावनाओं का प्रतीक होती है कारोबार में काफी उन्नति करते हैं कोई भी देखा यदि जंजीर जैसी आकृति की हो तो यह निर्बलता का लक्षण है यदि हृदय रेखा ऐसी हो तो वह हृदय की कमजोरी एवं समय में परिवर्तन शीलता का प्रतीक होती है यदि मस्तिष्क रेखा ऐसी हो तो विचारों में परिपक्वता की कमी बुद्धि की कमी को दर्शाती है किसी भी देखा यदि लहरदार जैसी आकृति की हो तो यह कमजोरी का लक्षण मानी जाती है तो यह अशुभ मानी जाती है
इस प्रकार हम रेखाओं को देख कर के हमारे जीवन में आने वाले संकटों का पता कर सकते हैं
जब कोई प्रमुख रेखा जैसे मस्तक रेखा या जीवन रेखा के साथ कोई सहायक रेखा चल रही हो तो प्रधान रेखा को बल मिलता है संकट टल सकता है ऐसे में यदि प्रधान रेखा टूटी हुई हो तो सहायक रेखा उसके दोषों को दूर कर देती है ऐसी किसी भी अन्य रेखा के अपेक्षा जीवन रेखा के साथ अधिक होता है यदि कोई भी रेखा अंत में दो शाखाओं में बट जाती हो तो उस रेखा को अधिक शक्ति मिलती है उदाहरण के लिए मस्तक रेखा पर यदि ऐसा हो तो जातक की मानसिक शक्ति में वृद्धि होगी किंतु ऐसी रेखा वाला व्यक्ति भिन्न स्वभाव वाला भी हो सकता है जब कोई रेखा गपुत्द मे समाप्त होती है तो ऐसा जिस रेखा पर हो उसकी कमजोरी एवं विनाश का प्रतीक समझना चाहिए यदि ऐसा आकार जीवन रेखा के अंत में हो तो व्यक्ति के स्नायु तंत्र कमजोर हो जाते हैं किसी भी रेखा से ऊपर की ओर उठती हुई साकाऐ उस रेखा को शक्ति प्रदान करती है जबकि नीचे जाने वाली शाखाएं ठीक इस से उल्टा फल देने वाली होती है यदि किसी प्राणी शादी की सफलता असफलता पर विचार करना हो तो हृदय रेखा के शुरू में रहने वाले रेखा बहुत विशेष होती है इसमें उठती हुई रेखाएं प्रेम का प्रतीक होती है तथा नीचे जाती हुई विपरीत फल देती है मस्तक रेखा पर ऊपर उठती हुई रेखाएं चतुर आत्मविश्वास लोगों की भावनाओं का प्रतीक होती है कारोबार में काफी उन्नति करते हैं कोई भी देखा यदि जंजीर जैसी आकृति की हो तो यह निर्बलता का लक्षण है यदि हृदय रेखा ऐसी हो तो वह हृदय की कमजोरी एवं समय में परिवर्तन शीलता का प्रतीक होती है यदि मस्तिष्क रेखा ऐसी हो तो विचारों में परिपक्वता की कमी बुद्धि की कमी को दर्शाती है किसी भी देखा यदि लहरदार जैसी आकृति की हो तो यह कमजोरी का लक्षण मानी जाती है तो यह अशुभ मानी जाती है
दांया और बांया हाथ -:
दाएं और बाएं हाथ के अंतर पर विचार करना अलग विषय है एक ऐसे व्यक्ति को जिसने हाथ बहुत कम देखे हो यह देख आश्चर्य होगा कि एक ही व्यक्ति के दोनों हाथ बिल्कुल अलग अलग प्रकार के होते हैं यह उनका अलग पन उनकी रेखाओं से पहचाना जाता है दोनों हाथों को अलग-अलग रूपों में ही पहचान ना जा सकता है कुछ ज्योतिषी मित्र केवल एक ही हाथ यानी दाएं हाथ को देखकर ही प्राणी के भाग्य का फैसला कर लेते हैं मेरे हिसाब से यह बात ज्योतिष विद्या के अनुकूल नहीं है जब तक आप किसी प्राणी के दोनों हाथों को नहीं देखते तब तक उनके भाग्य के विषय में आपका ज्ञान अधूरा ही माना जाएगा इसलिए जब भी आप किसी के भाग्य की रेखाएं पढ़ते हैं उस समय दोनों हाथों की रेखाओं को देखकर ही निर्णय करें !
बिल्कुल ठीक है कि बाया की हाथ व्यक्ति के प्राकृतिक स्वभाव को बताता है जबकि दाया हाथ व्यक्ति के प्रशिक्षण अनुभव और जीवन में जिस वार्ताओं का सामना उसने किया है उसके बारे में सब कुछ बताता है बाया हाथ देखने की पुरानी धारणा के पीछे यह सिद्धांत काम कर रहता है कि वह दिल के अधिक निकट होने के कारण प्राणी के जीवन को दिखाने का एकमात्र दर्पण है परंतु कुछ लोग इसे अंधविश्वास से अधिक नही मानेंगे क्योंकि यह सब रूढ़िवाद की बातें हैं जो आज के वैज्ञानिक युग में बड़ी बेकार सी लगती है ज्योतिष विद्या के अनुसार दोनों हाथों को साथ साथ रखकर इन का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए भविष्य में क्या होगा यह सब देखने के लिए सीधे हाथ पर निर्भर करें यह बात तभी बड़े मजे की है कि जो लोग बाएं हाथ से काम करने वाले हैं उनकी दाएं हाथ की रेखाएं अधिक स्पष्ट व बली होती है ऐसे लोगों की दाएं हाथ की रेखाओं को ही जन्मजात गुणों का आधार मानकर उनके हाथ को देखें वैसे भी दोनों हाथों की रेखाओं में अंतर कम होता है
जीवन रेखा -:
जिस प्रकार प्राणी के चेहरे पर आंख नाक कान होठ आदी की एक अलग से पहचान है ठीक वैसे प्राणी के हाथ की हथेली पर जीवन रेखा मस्तक रेखा जैसी दूसरी अनेक रेखाओं की भी पहचान बनी रहती है इन रेखाओं से हम भविष्य का ज्ञान जानते हैं जीवन रेखा अंगूठे और गुरु पर्वत से आरंभ होकर मंगल एवं शुक्र पर्वत को घेरते हुए कलाई तक पहुंचती है यदि यह रेखा लंबी साफ गहरी हो तो यह लंबी आयु सुंदर स्वस्थ जीवन शक्ति का प्रतीक होती है जिस हाथ में यह रेखा जितना अधिक अर्ध गोलाकार बनाती है यानी मंगल और शुक्र पर्वत का जितना अधिक क्षेत्र घेरती है प्राणी में जीवन शक्ति उतनी ही अधिक होती है यानी जीवन की हर संकट को झेलने की उस में शक्ति होती है इसके विपरीत जितनी पतली कमर ही टूटी फूटी हो तो प्राणी में जीवन शक्ति उतनी ही कम होती है व रोगों का शिकार होता रहता है ऐसे लोग दुखों से टूट जाते हैं ऐसे लोगों को बुढ़ापा जल्दी आता है टूटी-फूटी जीवन रेखा वाले लोगों को सदा बीमारियां घेरे रहती है कभी-कभी जीवन रेखा में छोटी-छोटी रेखाएं जो नीचे की ओर आती दिखाई देती है यह रेखाएं अधिक भोग के कारण जीवन शक्ति कम होना बताती है ऐसे लोग अधिक भोग विलासी होते हैं जो रेखाएं जीवन रेखा के मध्य भाग में दिखाई देती है और कभी जीवन रेखा के अंतिम भाग में होती है यदि ऐसी रेखा जीवन रेखा के आरंभ में हो तो ऐसे लोग बचपन से ही भूल सोसाइटी में पड़ जाते हैं यदि इन रेखाओं से आगे आकर जीवन रेखा पतली हो जाती है तो उसे बुरी संगत के भयंकर परिणाम भोगने पड़ते हैं यदि रेखाओं के आगे जीवन रेखा गहरी और साफ बनी रहती है तो उसका प्रभाव भविष्य में इतना अधिक नहीं होता यानी बुरी संगत छोड़कर अपने जीवन शक्ति की रक्षा में सफल होता है यदि ऐसी रेखा के मध्य भाग में हो तो ऐसे प्राणी अपने जीवन में दुखी होकर जीवन शक्ति खो बैठता है यदि यही रेखा की जीवन रेखा के अंतिम भाग में हो तो ऐसे लोग बुढापे में बुरी संगत में फंस जाते हैं कभी-कभी जीवन रेखा पर पाए जाते हैं यह जीवन में दुखों को बताते हैं जीवन रेखा के जिस भाग में यह चिन होंगे जीवन के विभाग में प्राणी को रोग शोक का सामना करना पड़ता है यदि जीवन रेखा मस्तक रेखा हृदय रेखा तीनो ही प्रारंभ हुई हो तो यह अत्यंत ही बुरा चिन्ह है ऐसे लोग अपने स्वाभाविक कमजोरी कारण अपने जीवन को भयंकर में डालते हैं यदि जीवन रेखा टूटी हुई हो और उसकी एक शाखा अंदर की ओर मुड़कर शुक्र पर्वत पर पहुंच जाए तो यह मृत्यु का प्रतीक होता है यदि यही निसान प्राणी के दोनों हाथों में एक सा हो तो इसका अर्थ है प्राणी कभी भी दुर्घटना का शिकार हो सकता है भयंकर रोग लग सकता है यदि यही रेखा मुड़कर टूटकर मंगल पर्वत तक चली जाए तो यह किसी शस्त्र के आक्रमण एवं गहरे घाव या किसी लड़ाई में किसी गहरी चोट के कारण बन सकती है जिस हाथ में जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा मिली हुई होती है वह भी केवल आरंभ और आगे चलकर अलग अलग हो जाती है इसका अर्थ है कि ऐसे लोग समाज और घर में मिलकर रहते हैं और दूसरों की भी मानते हैं कभी-कभी कई हाथों में दोनों रेखाएं एक दूसरे से अलग होकर चलती है इसका अर्थ है प्राणी के विचारों का धनी होना भी अपने विचारों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप पसंद नहीं करते हैं यह मार्गदर्शक बन सकते हैं किंतु किसी के पीछे नहीं चल सकते इनके अंदर आत्मविश्वास की भावना कूट-कूट कर भरी होती है कुछ लोगों के हाथों में जीवन रेखा मस्तक रेखा और हृदय रेखा यह तीनों मिली होती है ऐसे लोग दुर्भाग्यपूर्ण होते हैं यह लोग दूसरे के मामले में जबरन टांग पसारे हैं उनकी मृत्यु भी किसी ऐसी ही कारण से अचानक हो जाती है अगर जीवन रेखा के अंत में दो चिन्हो जिनमें से एक शाखा चंद्र पर्वत पर पहुंच जाए तो ऐसे लोग देश विदेश में घूमने वाले होते हैं
देखिए जीवन रेखा
देखिए जीवन रेखा
जीवन रेखा पर बिंदु, दीप, क्रोश, नक्षत्र ,इत्यादि चिन्हों का फल
बिन्दु -:
जीवन रेखा पर जहां कहीं भी बिंदु का चिन्ह हो तो समझ लो यह किसी रोग का प्रतीक है इस आयु का जो भी भाग आप जानना चाहेंगे उसके लिए इसके साथ ही आयु के तीन भागों में बांट कर आपको बताया गया है जिन लोगों की जीवन रेखा पर लाल बिंदु हो तो समझ लो कि उसकी आयु के इस भाग में बुखार का रोग लगेगा यदि बिंदु का रंग पीला हो तो ऐसी प्राणी जिगर रोगों से दुखी रहेंगे नीले रंग के बिंदु वाले लोग खून की कमी का शिकार होते हैं यदि जीवन रेखा एकदम से समाप्त हो जाए और उस समाप्त होने वाली स्तर बिंदु का निशान हो तो समझ लेना चाहिए कि ऐसे प्राणी का एक्सीडेंट होने वाला है
द्वीप -:
जिन लोगों की आयु रेखा दीप का चिन्ह हो तो ऐसे लोग कहीं प्रकार के रोगों के शिकार हो जाते हैं और उनको घरेलू तथा सामाजिक उलझनों का भी सामना करना पड़ता है
कृोस -:
आयु रेखा को यदि कोई रेखा काटती हुई गुजरती है तो समझ लेना चाहिए कि आयु इस भाग में किसी बहुत बड़े झंझट का सामना करना पड़ेगा यदि कोई रेखा मंगल सेत्र से निकलकर जीवन रेखा को काटती है तो समझ लो कि आपके किसी संबंधी अथवा मित्र से विवाद होने वाला है
नक्षत्र -:
जीवन रेखा पर यदि कोई नक्षत्र का चिन्ह हो तो उसे भी अशुभ ही माना जाता है इसका अर्थ है अशांति अथवा आयु के इस भाग में दुर्घटना का शिकार होना इस चीहनो की विशेषता यह है कि यह दुर्घटना होने के पश्चात ही हाथ से गायब हो जाता है यदि यही चीहन जीवन रेखा पर अथवा मंगल क्षेत्र में हो तो यह चिन्ह प्राणी के लिए अत्यंत लाभदायक भी हो जाता है ऐसे लोग हर समय खुश रहते हैं उनका भाग्य सदा उनका साथ देता है आयु के जिस भाग में यह चिन्ह वही भाग शुभ होता है उस आयु में प्राणी कोई भी काम प्रारंभ करें उसे लाभ ही प्राप्त होता है उस आयु में उसे कोई पुरस्कार अथवा उपाधि भी प्राप्त हो जाती है ऐसे चिहन काफी प्रसिद्ध और आविष्कारों के हाथों पर होते हैं
ःः नाखून ःः
जहां तक हम प्राणी के स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जानने की बात करते हैं तो इसके लिए नाखून एक अच्छे मार्गदर्शक का काम करते हैं बड़े-बड़े डॉक्टर नाखूनों से रोगी के बारे में बहुत कुछ जान लेते हैं सबसे पहले नाखूनों की देखभाल उनके आकार प्रकार में जरा भर भी परिवर्तन नहीं करती क्योंकि प्रकृति ने जो आकार उनका बना दिया उसे बदला नहीं जा सकता ज्योतिष विद्या के आधार पर हम नाखूनों को चार भागों में बांट सकते हैं
1.लंबे नाखून 2.छोटे नाखून. 3. चौड़े नाखून. 4.सकरे नाखून
लंबे नाखून-:
लंबे नाखून शारीरिक वैसे धौतक नहीं होते जैसे कि छोटे और चौड़े नाखून होते हैं छाती तथा फेफड़ों के रोगों के शिकार होते हैं यह बात तब और भी ठीक होती है जब नाखून थोड़े-थोड़े चारों ओर झुकी हुई हो यदि यह नाखून धारीदार हो तो और भी भाग्यशाली होते हैं लंबे नाखून यदि सिरे पर चौडे व नीलापन लिए हुए हो तो भी बीमारी की निशानी मानी जाती हैं ऐसे मामले अधिकतर 14 से 21 वर्ष 40 वर्ष से 47 वर्ष तक की औरतों में अधिक पाए जाते हैं
छोटे नाखून -:
हृदय रोगों के शिकार लोगों के परिवारों में अक्सर छोटे ही नाखून होते हैं यदि छोटे नाखून चपटे हो एवं किनारों पर मूड रहे हो अथवा ऊपर की ओर उठ रहे हो उन्हें हदयाघात रोग का पूर्व संकेत माना जाता है छोटे नाखून वालों में लंबे नाखून वालों के अपेक्षा हृदय रोगों की तथा धड से नीचे के अंगों पर प्रभाव डालने वाले रोगों से पीड़ित होने की अधिक संभावना रहती है यदि नाखूनों पर प्राकृतिक धब्बे हो तो ऐसे लोग बहुत जल्दी घबरा जाते हैं यदि उनके नाखून धब्बो से भरे पड़े हो तो उनके संपूर्ण स्थायुतंत्र की जांच चिकित्सा कराना आवश्यक हो जाता है छोटे एवं पतले नाखून कमजोर स्वास्थ्य एवं ऊर्जा की कमी को दर्शाते हैं नाखून यदि लंबे सक्रिय और ऊपर ऊठे हुए तथा मुड़े हुए भी हो तो रीड की हड्डी संबंधी रोग के प्रतीक होते हैं ऐसे नाखूनों वाले लोग कभी भी अच्छे स्वास्थ्य वाले नहीं हो सकते
हाथों पर बाल -:
हस्त विज्ञान के किसी प्रति वादक को पर्दे के पीछे बैठे किसी प्राणी का हाथ देखना पड़े तो हाथों पर उगे हुए बाल वैसे तो कोई खास नहीं लगते परंतु यदि इन्हें ज्योतिष की दृष्टि से देखा जाए तो वे बहुत ही विशेष होते हैं यह ज्ञान होना भी अति आवश्यक है कि वह बाल किन नियमों से नियंत्रित होकर उगते हैं यदि यही नई इन बालों के रंगों के बारे में भी जानकारी जरूरी है इसलिए बालों का ज्ञान जाने के लिए हमें अलग अलग से हैं उनका विश्लेषण करना होगा सबसे पहले यह जान लें कि बाल एक बारीक ट्यूब की भांति होता है यह प्राकृतिक त्वचा एवं त्वचा की शिराओं तथा नाडियों से संबंध रखते हैं यह बाल और प्रयोग शरीर की ऊर्जा को बाहर निकालने का कार्य करते हैं रंग के द्वारा ही यह ऊर्जा आगे बढ़ती है इसके बारे ज्योतिष के विद्यार्थियों को जान लेना जरूरी है कि इससे मानव के स्वभाव पर भी प्रभाव पड़ता है सफेद या हल्के रंग के बालों वाले लोगों के अंदर लोहे की कमी होती है अतः ऐसे लोग निस्तेज व उत्साह रहित होते हैं बहुत अधिक काले बालों वाले लोग यद्यपि कार्य करने में उत्साही होते हैं परंतु उनका स्वभाव क्रोधी वह चिडचिडा होता है सफेद बाल वालों की अपेक्षा प्रेम के मामले में काले बाल अच्छे होते है लाल रंग के बाल सफेद या काले बालों से एकदम विरोधी होते हैं यदि इन बालों का परीक्षण करें तो पाएंगे कि लाल रंग के बाल काले भूरे या सुनहरे बालों के अपेक्षा अधिक कड़े होते हैं यह अधिक रूखे तथा मोटे होते हैं इसलिए इनके द्वारा विद्युत प्रवाह की मात्रा भी अधिक होती है बल्कि इसलिए अधिक उत्तेजित तथा जल्दी काम करने वाले होते हैं मगर सुनहरे बालों वाले लोग इसे बहुत कम उत्तेजित होते हैं जब शरीर की व्यवस्था नशे की आदत के कारण नष्ट हो जाती है तो शारीरिक उर्जा उतनी मात्रा में नहीं बनती जितनी मात्रा में बननी चाहिए व शारीरिक व्यवस्था में खर्च हो जाती है



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