Rashiyon ka swabhav v prabhav राशियों का स्वभाव व प्रभाव-:
जैसा कि हम जानते हैं कि ज्योतिष शस्त्र में 12 राशियां होती है और प्रत्येक राशि का अलग-अलग स्वभाव व प्रभाव होता है। अतः आज की पोस्ट में हम 12 राशियों के स्वभाव व प्रभाव के विषय में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे, जो निम्न प्रकार है।
१,मेष राशि -:
मेष राशि पुरुष जाति की तथा पूर्व दिशा की स्वामिन होती है। लाल पीला रंग इसका मुख्य रंग होता है। इसका वर्ण क्षत्रिय होता है। यह चर संज्ञक व अग्नि तत्व प्रधान होती है। इसके स्वभाव में अहंकार साहस व डिसिप्लिन मुख्य रूप से देखा जाता है। अपने मित्रों के प्रति दयालु स्वभाव होता है। मेष राशि के स्वामी मंगल देव होते हैं। साथ ही सूर्य देव की यह उच्च राशि और शनिदेव की नीच राशि होती है। इससे मुख्य रूप से जाति के मस्ती का विचार किया जाता है।
२, वृषभ राशि -:
वृषभ राशि स्त्री जाति की राशि होती है। यह दक्षिण दिशा की स्वामिनी होती है। वृषभ राशि का रंग श्वेत होता है। यह अति शुभ कारक होती है। यह स्थर संज्ञक व वैश्य वर्ण की होती है। यह मुख्य रूप से भूमि तत्व प्रधान होती है। यह स्वार्थी और सांसारिक कार्य में दक्ष तथा बुद्धिमता से अपना काम निकालने वाली विशेषता इसमें मुख्य रूप से पाई जाती है। चंद्रदेव की उच्च राशि होती है। तथा केतु देव की यह नीच राशि होती है। इससे जातक का मुंह और गालों का मुख्य रूप से विचार किया जाता है। इस राशि को अर्ध जल राशि भी कहा जाता है। शुक्र देव इसके स्वामी होते हैं।
३, मिथुन राशि -:
मिथुन राशि पुरुष जाति की होती है तथा पश्चिम दिशा की स्वामिनी होती है। शुद्र वर्ण व द्वि स्वभाव संज्ञक होती है। इस का मुख्य रंग हरा होता है। यह विद्या संबंधी व शिल्प संबंधी कारकत्व इसमें मुख्य रूप से पाए जाते हैं यह उसमें स्वभाव की होती है। गुरुदेव उसके स्वामी होते हैं राहु देव की उच्च राशि और केतु देव की नीच राशि होती है। मिथुन राशि से जातक के स्कन्ध भुजाओं का मुख्य रूप से विचार किया जाता है।
४, कर्क राशि -:
कर्क राशि स्त्री जाति व उत्तर दिशा के स्वामीनी होती है। रक्त धवल मिश्रित रंग वाली, चिकनी व उसका स्वभाव की होती। यह चर संज्ञक व शुद्र वर्ण की होती है। साथ ही यह जलतत्व प्रधान होती है। इसके स्वभाव में सौम्यता और समय के अनुसार व्यवहार की क्षमता पाई जाती है। यह सांसारिक उन्नति के लिए निरंतर प्रगतिशील रहने वाली होती है। चंद्रदेव इसके स्वामी होते हैं तथा गुरु बृहस्पति की यह उच्च राशि व मंगल देव के नीच राशि होती है। इससे जातक के वक्षस्थल व गुर्दों का मुख्य रूप से विचार किया जाता है।
५, सिंह राशि -:
यह राशि स्थर संज्ञा, उष्ण स्वभाव , क्षत्रिय वर्ण, पूर्व दिशा की स्वामिनी स्वभाव व अग्नि तत्व प्रदान होती है।और इसका स्वभाव मेष राशि से बहुत अधिक समानता रखता है। जातक के हृदय का विचार किया जाता है। तथा इसके स्वामी सूर्य देव होते हैं।
६, कन्या राशि -:
यह राशि स्त्री जाति की व दक्षिण दिशा की स्वामिनी होती है। इसका रंग पिंगल होता है। तथा द्वि स्वभाव संज्ञक होती है। इसमें पृथ्वी तत्व की अधिकता होने कारण इसे पृथ्वी संज्ञक कहा जाता है। इसमें मिथुन राशि के समान समत पाई जाती है।
किंतु उन्नति के लिए यह अधिक सतर्क रहने वाली होती है। जातक के पेट का मुख्य रूप इससे विचार किया जाता है। बुध इसके राशि के स्वामी होते हैं और बुध की ही उच्च राशि होती है शुक्र देव की यह नीच राशि होती है।
७,तुला राशि -:
यह राशि पुरुष जाति की होती है। पश्चिम दिशा की स्वामिनी, शुद्र वर्ण, क्रूर स्वभाव व चर संज्ञक होती है। श्याम रंग व ज्ञान प्रिय व राजनीति के क्षेत्र में रुचि रखने वाली होती है। इसके द्वारा जातक की नाभि व नीचे के अंगो का विचार किया जाता है शुक्र देव इस राशि के स्वामी होते हैं। शनि देव इसमें उच्च के व सूर्य देव नीच के होते है।
८, वृश्चिक राशि -:
यह राशि स्त्री जाति की होती है इस कारण शुभ होता है। तथा स्थर संज्ञक होती है। यह स्पष्ट वादी दृढ़ संकल्प व हठी स्वभाव की होती है। जातक की जनन इंद्रियों का विचार इससे किया जाता है। मंगल देव इस के स्वामी होते हैं। राहु देव की यह नीच व केतु देव की उच्च की होते हैं।
९,धनु राशि -:
यह राशि पुरुष जाति, सुनहरे रंग, क्षत्रिय वर्ण व द्वि स्वभाव संज्ञक होती है। पूर्व दिशा की स्वामिनी व अग्नि तत्व प्रधान होती है। इसका स्वभाव करुणामय व मर्यादित होता है। इससे जातक के पांव व जांघो का मुख्य रूप से विचार किया जाता हैं। गुरुदेव बृहस्पति इसके स्वामी होते हैं। केतु देवकी यह उच्चकी राशि व राहु देव की नीच की राशि होती है।
१०, मकर राशि -:
यह राशि स्त्री जाति की व दक्षिण दिशा के स्वामीनी होती है। पिंगल रंग वैश्य वर्ण व पृथ्वी तत्व प्रधान होती है। इसका स्वभाव उच्च अभिलाषी होता है। जातक के पांवों और घुटनों का विचार किया जाता है। शनि इसके स्वामी होते हैं। मंगल देव की उच्च राशि व गुरु देव की नीच राशि होती है।यह चर संज्ञक होती है।
११, कुंभ राशि -:
यह राशि पुरुष जाति व पश्चिम दिशा की स्वामीनी होती है। यह स्थर संज्ञक होती है। विचित्र रंग शुद्र वर्ण व वायु तत्व प्रधान होती है। इससे जातक के पेट के अंदर की संरचना का विचार किया जाता है। यह नवीन खोजों का कारक होती है। शनिदेव इसके स्वामी होते हैं।
१२,मीन राशि -:
यह राशि स्त्री जाति की उत्तर दिशा की स्वामिनी और पीत रंग की होती है। दिस्वभाव संज्ञक व जलीय तत्व प्रधन होती है।
यह दयालु धार्मिक व परोपकार स्वभाव की होती है। जातक के पैरों के नीचे के भागों का विचार इससे मुख्य रूप से किया जाता है। बृहस्पति इसके स्वामी होते हैं। शुक्रदेव की यह उच्च राशि होती है।
आचार्य कौशल कुमार शास्त्री 9414657245.
| Astrologer KK shastri |
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