नव लक्ष्मी योग

 नव लक्ष्मी योग -:

जिन जातकों की जन्मकुंडली में एकादश भाव का स्वामी केंद्र में हो और एकादश भाव को देखता हो लग्नेश एकादश भाव में हो तथा नवमेश नवम भाव में स्थित हो तो नवलक्ष्मी महायोग का निर्माण होता है। जिनकी जन्म कुंडली में इस योग का निर्माण होता है। वह अटूट संपत्ति वान ऐश्वर्या युक्त सुखी संपन्न तथा ख्याति प्राप्त होता है।

धन प्राप्ति की दिशा योग -:

एकादश भाव का स्वामी जिस दिशा का स्वामी हो उसी दिशा से धन लाभ होता है। जिस दिशा में धन लाभ योग हो उस दिशा में प्रयत्न करने से शीघ्र ही विशेष लाभ की प्राप्ति होती है। अतः एकादश भाव का स्वामी सूर्य हो तो पूर्व दिशा, शुक्र हो तो अग्नि कोण, मंगल दक्षिण, राहु  नैतृत्रिकोण, शनि पश्चिम, चंद्र वायूकोन बुध उत्तर, गुरु ईशान कोण से धन लाभ प्राप्त करने वाले होते हैं।

पुत्र से धन प्राप्ति योग -:

यदि दूसरे भाव का स्वामी पंचम भाव के स्वामी और पंचम भाव के कारक के ग्रह से युक्त अथवा दृष्ट हो या धनेश बलवान हो तो पुत्र से धन प्राप्त होता है। जिनकी कुंडली में यह योग होता है। उसे पुत्र के माध्यम से बहुत अधिक धन प्राप्ति होती है।



कोटीश योग -:

लग्न के नवांश का स्वामी और भाग्येश ये दोनों परम उच्चांश में हो और लाभेश बलवान हो तो कोटीश  योग होता है। जिस जातक की जन्मकुंडली में कोटिस योग होता है। वह साधारण कुल में जन्म लेकर करोड़पति  बनता है।


एस्ट्रोलॉजर आचार्य कौशल कुमार शास्त्री
वैदिक ज्योतिष शोध संस्थान चौथ का बरवाड़ा
 सवाई माधोपुर, राजस्थान 9414 6572 45



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