Adhik mas snan ke niyam

 

अधिक मास स्नान के नियम -:

अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में स्नान के कुछ पारंपरिक नियम और विधियाँ मानी जाती हैं। इस महीने में स्नान, जप, दान और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

अधिक मास स्नान के मुख्य नियम

ब्रह्ममुहूर्त में स्नान

सूर्योदय से पहले या सूर्योदय के समय स्नान करना श्रेष्ठ माना जाता है।

यदि संभव हो तो नदी, सरोवर या तीर्थ में स्नान करें, अन्यथा घर में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।

संकल्प लें

स्नान से पहले भगवान विष्णु/श्रीकृष्ण का स्मरण करके अधिक मास व्रत एवं पुण्य का संकल्प लें।

शुद्धता का ध्यान

मन, वचन और शरीर की पवित्रता रखें।

क्रोध, झूठ, निंदा और तामसिक आहार से बचें।

स्नान के बाद पूजा

पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।

भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण या श्री हरि विष्णु की पूजा करें।

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।

दान का महत्व

स्नान के बाद अन्न, वस्त्र, घी, गुड़, फल या दक्षिणा का दान करना पुण्यदायक माना गया है।

सात्विक भोजन

लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा आदि से परहेज रखें।

एक समय भोजन या फलाहार करने वाले भी कई लोग होते हैं।

विशेष स्नान मंत्र स्नान करते समय यह प्रार्थना बोल सकते हैं —

“गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति।

नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥”

अधिक मास में प्रतिदिन स्नान, विष्णु पूजा, गीता पाठ और दान को विशेष फलदायी माना गया है।



अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में भोजन के नियम मुख्यतः सात्विकता, संयम और भगवान श्री हरि विष्णु की भक्ति पर आधारित माने गए हैं। विभिन्न परंपराओं में थोड़ा भेद हो सकता है, लेकिन सामान्य नियम ये हैं:

अधिक मास में भोजन के प्रमुख नियम

1. सात्विक भोजन करें

शुद्ध, ताजा और हल्का भोजन लें।

घर का बना भोजन श्रेष्ठ माना जाता है।

2. इन चीजों से परहेज

मांस, मछली, अंडा

शराब एवं नशा

लहसुन, प्याज (कई वैष्णव परंपराओं में)

बासी भोजन

अधिक तला-भुना एवं तामसिक भोजन

3. संयम रखें

अधिक भोजन न करें।

कई लोग:

एक समय भोजन,

फलाहार,

अथवा उपवास रखते हैं।

4. भगवान को भोग लगाकर भोजन

भोजन से पहले भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण को भोग लगाना शुभ माना जाता है।

भोजन से पहले प्रार्थना करें।

5. ब्रह्मचर्य एवं शुद्ध आचरण

भोजन के साथ व्यवहार और वाणी की शुद्धता भी महत्वपूर्ण मानी गई है।

क्रोध, झूठ, निंदा से बचना चाहिए।

6. दान का महत्व

भोजन से पहले या बाद में:

गौ सेवा,

ब्राह्मण भोजन,

गरीबों को अन्नदान

बहुत पुण्यदायक माना गया है।

क्या खा सकते हैं?

दूध, दही, घी

फल

मूंग दाल

गेहूँ, चावल

सूखे मेवे

सेंधा नमक (यदि व्रत हो)

विशेष मान्यता

अधिक मास में जितना अधिक सात्विक और संयमित जीवन रखा जाए, उतना अधिक पुण्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है।




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