निर्जला एकादशी का महत्व -:
निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इसका वर्णन महाभारत तथा पद्म पुराण में मिलता है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।
इस दिन बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की उपासना की जाती है।
मान्यता है कि जो व्यक्ति वर्ष भर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं कर पाता, उसे निर्जला एकादशी का व्रत करने से सभी 24 एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है।
यह व्रत पापों के क्षय, मन की शुद्धि तथा मोक्षदायक माना गया है।
जलदान, अन्नदान और ब्राह्मण-सत्कार का विशेष महत्व बताया गया है।
निर्जला एकादशी व्रत के नियम -:
दशमी (एक दिन पहले)
सात्त्विक भोजन करें।
लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा आदि का त्याग करें।
रात्रि में संयम रखें और भगवान विष्णु का स्मरण करें।
एकादशी के दिन
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और तुलसी जी का पूजन करें।
व्रत का संकल्प लें।
पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करें (स्वास्थ्य की अनुमति होने पर)।
विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ, या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें।
यथासंभव रात्रि जागरण एवं भजन-कीर्तन करें।
द्वादशी के दिन पारण
सूर्योदय के बाद निर्धारित पारण समय में व्रत खोलें।
पहले भगवान को भोग अर्पित करें।
जल ग्रहण करके तथा सात्त्विक भोजन करके पारण करें।
दान-दक्षिणा देना शुभ माना जाता है।
विशेष सावधानी -:
यदि किसी को मधुमेह, गंभीर बीमारी, गर्भावस्था या अन्य स्वास्थ्य समस्या हो, तो पूर्ण निर्जल व्रत न करें। अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या जल के साथ व्रत कर सकते हैं। धर्मशास्त्रों में भी स्वास्थ्य की रक्षा को महत्व दिया गया है।
निर्जला एकादशी का सरल संकल्प--
"मैं भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति, पाप-क्षय और आत्मशुद्धि के लिए निर्जला एकादशी व्रत का संकल्प करता/करती हूँ।
"
निर्जला एकादशी गुरुवार, 25 जून 2026 को पड़ेगी।
प्रमुख तिथि (भारतीय समयानुसार)
एकादशी तिथि प्रारंभ : 24 जून 2026 सायं 6:12 बजे
एकादशी तिथि समाप्त : 25 जून 2026 रात्रि 8:09 बजे
निर्जला एकादशी व्रत : 25 जून 2026 (गुरुवार)
पारण : 26 जून 2026 प्रातः ल
गभग 5:25 बजे से 8:13 बजे के मध्य
आचार्य कौशल कुमार शास्त्री
9414657245

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