दक्षिण दिशाका वास्तु टिप्स -: दक्षिण दिशा वास्तुशास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। इसका स्वामी यम देव तथा ग्रह मंगल ग्रह माने जाते हैं। यह दिशा स्थिरता, आत्मबल, अनुशासन, भूमि, सुरक्षा, प्रतिष्ठा और जीवन में नियंत्रण का प्रतीक है। यदि दक्षिण दिशा संतु…
Read moreनिर्जला एकादशी 2026 (भीमसेनी एकादशी) -: निर्जला एकादशी ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है। वर्ष 2026 में यह 25 जून, गुरुवार को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 24 जून सायं 6:12 बजे से प्रारम्भ होकर 25 जून रात्रि 8:09 बजे तक रहेगी। व्रत का पारण 26 जून प्रातः 5:25 …
Read moreनिर्जला एकादशी का महत्व -: निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इसका वर्णन महाभारत तथा पद्म पुराण में मिलता है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। मान्यता है कि जो व्यक्ति व…
Read moreगंगा दशमी कब मनाई जाएगी ? वर्ष 2026 में गंगा दशमी (गंगा दशहरा) 25 मई 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। गंगा दशमी क्यों मनाई जाती है? …
Read moreकेतु का द्वादश भाव में शुभ अशुभ फल -: नमस्कार साथियों! आज की चर्चा में हम जानेंगे केतु देव का पत्रिका के द्वादश भाव में शुभ अशुभ परिणाम के विषय में तो आईए जानते हैं केतु देव पत्रिका के सभी भाव में किस प्रकार का सामान्य परिणाम प्रदान करते हैं! जैसा कि हम जान…
Read moreशनि देव का जीवन परिचय -: शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है। वे नवग्रहों में प्रमुख स्थान रखते हैं और कर्मफलदाता हैं। शनि देव का जन्म वैशाख मास की अमावस्या को हुआ था, जिसे शनि जयंती कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, वे भगवान सूर्य और छाया (संवर्णा) …
Read moreभवन निर्माण में वास्तु का महत्व एवं सामान्य नियमों के अनुसार महत्वपूर्ण जानकारी: वास्तु का महत्व -: वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है, जो भवन निर्माण, भूखण्ड चयन, दिशा ज्ञान, ऊर्जा संतुलन और सुख-समृद्धि हेतु स्थान नियोजन पर आधारित है। भवन निर्माण …
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