दक्षिण दिशाका वास्तु टिप्स -: दक्षिण दिशा वास्तुशास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। इसका स्वामी यम देव तथा ग्रह मंगल ग्रह माने जाते हैं। यह दिशा स्थिरता, आत्मबल, अनुशासन, भूमि, सुरक्षा, प्रतिष्ठा और जीवन में नियंत्रण का प्रतीक है। यदि दक्षिण दिशा संतु…
Read moreकेतु का द्वादश भाव में शुभ अशुभ फल -: नमस्कार साथियों! आज की चर्चा में हम जानेंगे केतु देव का पत्रिका के द्वादश भाव में शुभ अशुभ परिणाम के विषय में तो आईए जानते हैं केतु देव पत्रिका के सभी भाव में किस प्रकार का सामान्य परिणाम प्रदान करते हैं! जैसा कि हम जान…
Read more5 दिसंबर से बृहस्पति के वक्री होकर मिथुन राशि में गोचर का सभी 12 राशियों पर प्रभाव -: गुरु अपनी उच्च कर्क राशि से वक्री होकर 5 दिसंबर से मिथुन राशि में गोचर करने जा रहे हैं। इससे पहले 18 अक्टूबर 2025 को बृहस्पति अतिचार होकर मिथुन राशि से अपनी उच्च कर्क …
Read moreभवन निर्माण में वास्तु का महत्व एवं सामान्य नियमों के अनुसार महत्वपूर्ण जानकारी: वास्तु का महत्व -: वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है, जो भवन निर्माण, भूखण्ड चयन, दिशा ज्ञान, ऊर्जा संतुलन और सुख-समृद्धि हेतु स्थान नियोजन पर आधारित है। भवन निर्माण …
Read moreबुध रत्न पन्ना की संपूर्ण विस्तृत जानकारी -: जैसा कि हम सब जानते हैं कि बुद्धदेव का प्रतिनिधित्व पन्ना रत्न करता है। जन्म कुंडली में बुद्धदेव योग कारक की स्थिति में होते हैं तो उस स्थिति में बुध को बलवान बनाने के लिए पन्ना रत्न धारण किया जाता है। पन्ना रत्न…
Read moreआपको कितनी संतान होगी, संतान का सुख कैसा रहेगा, संतान विषयक संपूर्ण सूक्ष्म विश्लेषण कैसे करें ? आज की परिचर्चा में हम एक महत्वपूर्ण विषय को लेकर के उपस्थित हैं। आज हम संतान संबंधी आवश्यक प्रश्नों को सूक्ष्मता से समझने का प्रयास करेंगे। आज हम जाने की कोशिश क…
Read moreअष्टक वर्ग का महत्व पार्ट 1 -: जय श्री राम मित्रों ज्योतिष शास्त्र का एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय होता है जिसे अष्टक वर्ग कहा जाता है। कुंडली के फलादेश में अष्टक वर्ग का सर्वाधिक महत्व होता है। गोचर कुंडली अवलोकन अष्टक वर्ग के बिना अपूर्ण होता है। अष्टक वर्ग…
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